देहरादून। उत्तराखंड की आधे से अधिक जेलों में उसकी क्षमता से दुगने तक कैदी बंद हैं। यह खुलासा सूचना अधिकार के तहत ली गई सूचना में हुआ है। क्षमता से सबसे अधिक लगभग दोगुने कैदी जिला कारागार नैनीताल में बंद हैं। इस कारागार की क्षमता 71 कैदियों की है, लेकिन यहां 141 कैदी बंद हैं। इसके अलावा कुछ कारागार ऐसे भी हैं जहां कि क्षमता से कम कैदी बंद हैं। क्षमता से सबसे कम 56 कैदी 300 क्षमता वाली सम्पूर्णनन्द शिविर (खुली जेल) सितारगंज में बंद हैं। राज्य में 11 कारागार हैं, जिनमें कि 4812 कैदी बंद हैं।
सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन ने महानिरीक्षक कारागार (कारागार मुख्यालय) से उत्तराखंड की जेलों में बंदियों की क्षमता तथा वर्तमान में बंद कैदियों की संख्या के सम्बन्ध में सूचना मांगी थी। इसके उत्तर में मुख्यालय कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग उत्तराखंड के लोक सूचना अधिकारी ने अपने पत्रांक 442 दिनांक 23 फरवरी 2026 से जेलों की क्षमता तथा बंदियों का विवरण उपलब्ध कराया है।
सूचना अधिकार के तहत उपलब्ध सूचना के अनुसार क्षमता से सबसे अधिक लगभग दोगुने 141 कैदी 71 क्षमता वाली जिला कारागार नैनीताल में बंद हैं जबकि दूसरे स्थान पर क्षमता के 185 प्रतिशत 189 कैदी 102 क्षमता वाली जिला कारागार अल्मोड़ा में बंद हैं। तीसरे स्थान पर 157 प्रतिशत कैदी 911 कैदी 580 क्षमता वाली देहरादून जेल में बंद हैं। चैथे स्थान पर क्षमता के 152 प्रतिशत 1025 कैदी 675 क्षमता वाली उपकारागार हल्द्वानी जेल में बंद हैं। पांचवें स्थान पर क्षमता के 140 प्रतिशत 772 कैदी 552 क्षमता वाली केन्द्रीय कारागार सितारगंज जेल में बंद हैं। छठे स्थान पर क्षमता के 122 प्रतिशत 298 कैदी 244 क्षमता वाली उपकारागार रूड़की में बंद है।
प्राप्त सूचना के अनुसार क्षमता से सबसे कम 19 प्रतिशत 56 कैदी 300 क्षमता वाली सम्पूर्णनन्द शिविर (खुली जेल) सितारगंज में बंद हैं जबकि दूसरे स्थान पर क्षमता के 64 प्रतिशत 109 कैदी 169 क्षमता वाली जिला कारागार चमोली में बंद हैं। तीसरे स्थान पर क्षमता के 72 प्रतिशत 108 कैदी 150 क्षमता वाली जिला कारागार पौड़ी में बंद हैं। चैथे स्थान पर क्षमता के 98 प्रतिशत 78 कैदी 80 क्षमता वाली जिला कारागार पिथौरागढ़ में बंद हैं जबकि जिला कारागार टिहरी में क्षमता के अनुरूप 150 कैदी ही बंद है।
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