बीकेटीसी ने केदारनाथ के तीर्थ-पुरोहितों को बांटे 11 लाख, RTI खुलासे के बाद फंड दुरुपयोग के गंभीर आरोप, सीएम पुष्कर सिंह धामी से उच्चस्तरीय जांच की मांग

-10 अक्टूबर को विरोध, 12 अक्टूबर को 11 लाख मंजूर, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी: विकेश नेगी

-नोटशीट से लेकर भुगतान तक गड़बड़ी, 11 लाख का मामला बड़ा घोटाला साबित हो सकता : नेगी

देहरादून: श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) एक बार फिर विवादों में घिर गई है। आरोप है कि धामों में तीर्थ यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं देने में नाकाम समिति, श्रद्धालुओं के दान-चढ़ावे की रकम का मनमाने ढंग से इस्तेमाल कर रही है। सामाजिक कार्यकर्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने एक बार फिर श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) को लेकर खुलासा करते हुए फंड दुरुपयोग सहित कई गंभीर आरोप लगाये हैं।

देहरादून कचहरी परिसर स्थित अपने कार्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने दावा करते हुए कहा कि कहा सूचना के अधिकार (RTI) के जरिए सामने आए दस्तावेजों के आधार पर वर्ष 2025 में केदारनाथ के तीर्थ-पुरोहितों की संस्था ‘केदार सभा’ को नियमों को दरकिनार कर 11 लाख रुपये का भुगतान किया गया। यह भुगतान ऐसे समय में हुआ जब केदार सभा ने बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के खिलाफ खुलकर विरोध जताया था, जिससे पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए हैं।

ढाई महीने बाद अचानक स्वीकृति, नोटशीट में भी कई खामियां
अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने कहा कि आरटीआई में सामने आया है कि केदारनाथ धाम में 25 जुलाई से 1 अगस्त 2025 के बीच श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन हुआ था। लेकिन आयोजन समाप्त होने के करीब ढाई महीने बाद, 12 अक्टूबर 2025 को बीकेटीसी के स्तर पर आनन-फानन में दो अलग-अलग नोटशीट तैयार कर 11 लाख रुपये की स्वीकृति दे दी गई। इन नोटशीट्स पर तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी विजय थपलियाल, उपाध्यक्ष विजय सिंह कप्रवाण और अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के हस्ताक्षर मौजूद हैं।

हैरानी की बात यह है कि पूरे भुगतान प्रक्रिया में वित्त नियंत्रक की कोई सहमति नहीं ली गई, जो वित्तीय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना जा रहा है। इसके अलावा नोटशीट में यह तक स्पष्ट नहीं किया गया कि केदार सभा ने आर्थिक सहयोग के लिए लिखित आवेदन दिया था या केवल मौखिक अनुरोध किया गया था। संबंधित पत्र भी आरटीआई में उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

विरोध के बाद भुगतान, ‘सेटिंग’ के आरोप,
अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी के अनुसार, 10 अक्टूबर 2025 को केदार सभा ने बीकेटीसी अध्यक्ष की कार्यशैली के खिलाफ मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आंदोलन की चेतावनी दी थी। इसके ठीक दो दिन बाद 12 अक्टूबर को 11 लाख रुपये की स्वीकृति मिलना कई तरह के संदेह पैदा करता है। नेगी का आरोप है कि यह पूरा मामला ‘विरोध शांत कराने’ के लिए धन के दुरुपयोग का संकेत देता है। इतना ही नहीं, कथा की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए ‘तीतर मीडिया एंड एडवर्टाइजिंग कंपनी’ को 1.5 लाख रुपये का भुगतान भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि इस कार्य के लिए अपनाई गई कोटेशन प्रक्रिया संदिग्ध थी, तीनों कंपनियों के कोटेशन एक ही तारीख पर और लगभग एक जैसी भाषा में प्रस्तुत किए गए, जिससे मिलीभगत की आशंका और गहरा गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उच्चस्तरीय जांच की मांग
अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड की बात करते हैं लेकिन एक के बाद एक बीकेटीसी में घपले-घोटाले व भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बीकेटीसी में सामने आ रहे घपले-घोटालों व भ्रष्टाचार को लेकर उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला प्रदेश में मंदिर प्रबंधन की विश्वसनीयता पर गंभीर असर डाल सकता है।

पत्रकारों के सवाल व अधिवक्ता विकेश सिंह नेेगी के जवाब
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने कहा सूचना के अधिकार के तहत हमने कई बिंदुओं पर BKTC से जानकारी मांगी थी। उनका बिंदुवार अध्ययन कर हम इसे सार्वजनिक कर रहे हैं। BKTC द्वारा हमें जो दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं उनमें कई चौंकाने वाली जानकारी मिल रही है। पिछले दिनों खुलासा किया था कि BKTC के एक उपाध्यक्ष विजय सिंह कप्रवाण द्वारा किस तरह से अपनी पत्नी को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दिखा कर प्रतिमाह बारह हजार रूपये लिए जा रहे हैं।

बदरीनाथ व केदारनाथ धाम करोड़ों- करोड़ों सनातनियों की आस्था व श्रद्धा के केंद्र हैं। मगर BKTC में श्रद्धालुओं के दान-चढ़ावे के पैसों की बंदरबांट चल रही है। RTI से प्राप्त दस्तावेजों में एक जानकारी यह भी मिली है कि विगत वर्ष 2025 में BKTC ने केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों की संस्था “केदार सभा” को 11 लाख रुपये की धनराशि दे दी। यह पैंसा केदार सभा को 25 जुलाई से 01 अगस्त, 2025 तक केदारनाथ धाम में श्रीमद भागवत कथा के आयोजन के नाम पर दिया गया।

विकेश सिंह नेगी ने कहा सवाल यह उठता है कि BKTC ने इतनी बड़ी धनराशि किस नियम अथवा प्रावधान के तहत तीर्थ पुरोहितों को दे दी? क्या BKTC ने इसके लिए प्रदेश शासन से अनुमति ली थी ? यदि अनुमति ली है तो उसे सार्वजनिक करें।  एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि BKTC में वित्त नियंत्रक तैनात हैं। तीर्थ पुरोहितों को ग्यारह लाख रूपये देने की स्वीकृति देने वाली फाइल पर वित्त नियंत्रक की सहमति और स्वीकृति क्यों नहीं ली गई ? बिना वित्त नियंत्रक की सहमति के पैंसा जारी करना अपने आप में बड़ी वित्तीय अनियमितता है।

विकेश सिंह नेगी ने कहा तीर्थ पुरोहितों को मंदिर का पैंसा बांटने के पीछे ऐसा लगता है कि BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी अपना व्यक्तिगत प्रबंधन कर रहे हैं। क्योंकि पिछले वर्ष 10 अक्टूबर को तीर्थ पुरोहितों ने द्विवेदी की कार्यशैली को लेकर आक्रोश व्यक्त किया था और मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर द्विवेदी को हटाने की मांग की थी। BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के विरोध के दो दिन बाद 12 अक्टूबर को BKTC ने आनन-फानन में तीर्थ पुरोहितों को 11 लाख रूपये देने की पत्रावली चलायी और उसी दिन स्वीकृति भी दे दी गयी। जबकि केदार सभा का भागवत कथा का आयोजन 25 जुलाई से 01 अगस्त, 2025 तक संपन्न हो चुका था। इससे यह आभास होता है कि BKTC अध्यक्ष ने तीर्थ पुरोहितों के विरोध को मैनेज करने के लिए उन्हें यह पैंसे दिए।  अच्छा होता कि मंदिर समिति अध्यक्ष यात्री सुविधाओं और मंदिरों के प्रबंधन की ओर ध्यान देते। बजाय कि अपने व्यक्तिगत प्रबंधन पर।

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने कहा जैसा कि अभी कुछ दिन पहले मीडिया व सोशल मीडिया के द्वारा भी जानकारी मिली थी कि BKTC ने केदार सभा के अध्यक्ष समेत एक अन्य तीर्थ पुरोहित को विशेष आमंत्रित सदस्य नियुक्त किया है। मंदिर समिति एक्ट में प्रावधान है कि विशेष आमंत्रित सदस्य नियुक्त करने के लिए पहले शासन नियम बनाएगा। उसके पश्चात BKTC विशेष आमंत्रित सदस्य नियुक्त कर सकती है।  मगर BKTC ने नियम विरुद्ध तरीके से सदस्यों की नियुक्ति कर दी। इन सदस्यों की कोई वैधानिक मान्यता नहीं है। प्रदेश सरकार को  मामलों का संज्ञान लेना चाहिए।  BKTC में जिस प्रकार से नियम कानूनों को ताक पर रख कर कार्य हो रहे हैं सरकार को उनकी उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिए।

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