मंदिर,सत्संग और गुरु दर्शन के लिए जब भी जाएं अहंकार को त्याग कर जाना चाहिए: आचार्य महामाया प्रसाद

देहरादून। सरस्वती विहार विकास समिति के तत्वावधान में शिव शक्ति मंदिर सरस्वती विहार अजबपुर खुर्द में शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस के अवसर पर कथा महात्म्य में परम पूज्य आचार्य महामाया प्रसाद ने कहा की भगवान के मंदिर,सत्संग और गुरु दर्शन के लिए जब भी जाएं अहंकार को त्याग कर जाना चाहिए। माता सती रूपी जीव को शिव वर रूप में तो प्राप्त हो गया पर जब सत्संग के लिए गए मां सती अहंकार के वशीभूत हो गुरुवाणी श्रवण नहीं कर पाई। सत्संग श्रवण न करने का परिणाम ये हुआ कि भगवान श्रीराम को नहीं पहचान पाई। शिव ने कहा श्रीराम सच्चिदानंद परमात्मा हैं फिर भी उनके विरुद्ध जाकर सीता का रूप धारण करके श्री राम की परीक्षा लेकर श्रीराम का घोर अपमान किया..वापस आकर शिव से झूठ कह दिया। कछु न परीक्षा लींन्ह गुसाईं मैने कोई परीक्षा नहीं ली… अंत में इन अपराधों का परिणाम ये हुआ कि माता सती को देह का  परित्याग करना पड़ा ..अर्थात यदि माता सती अहंकार याद करके गुरु चरणों में बैठ कर सत्संग के माध्यम से भगवान श्री राम की महिमा सुन लेती तो जीवन में ये कष्ट नहीं आता। अगले जन्म में पार्वती के रूप में अवतरित हो कर कठोर तपस्या के प्रभाव से भगवान शिव को पुनः पति रूप में प्राप्त किया ..फिर उन्होंने अहंकार को त्याग करके महादेव के श्री मुख से निरंतर सत्संग श्रवण किया। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष पंचम सिंह बिष्ट वरिष्ठ उपाध्यक्ष बीएस चैहान उपाध्यक्ष कैलाश राम तिवारी सचिव गजेंद्र भंडारी मंदिर संयोजक  मूर्ति राम बिज्जलवान, सह संयोजक दिनेश जुयाल, वरिष्ठ मंत्री अनूप सिंह फर्तियाल, विजय सिंह रावत, मंगल सिंह कुट्टी, जयप्रकाश सेमवाल, चिंतामणि पुरोहित, बसंत सिंह दफोनी, बीपी शर्मा, पीएल चमोली, आशीष गुसांईं, आचार्य उदय प्रकाश नौटियाल, आचार्य सुशांत जोशी, आचार्य अखिलेश बधानी, वेद किशोर शर्मा, पुष्कर सिंह नेगी आदि उपस्थित थे।

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