छत्तीसगढ़ की आदिवासी शौर्य गाथा से रूबरू हुआ उत्तराखंड का मीडिया प्रतिनिधिमंडल

-शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का पत्रकारों ने किया भ्रमण
-16 गैलरियों में 1774 से 1939 के बीच हुए विभिन्न जनजातीय विद्रोहों और स्वतंत्रता आंदोलनों को प्रदर्शित किया गया

देहरादून। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत पीआईबी देहरादून की ओर से आयोजित पांच दिवसीय अध्ययन एवं मीडिया एक्सपोजर टूर के पांचवे दिन मीडिया दल ने छत्तीसगढ़ के संग्रहालय का दौरा कर आदिवासी नायकों के संघर्ष और योगदान को करीब से जाना। छत्तीसगढ़ का यह संग्रहालय आदिवासी समुदायों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लंबे समय तक संघर्ष के इतिहास को आम जनमानस तक पहुंचाने का माध्यम है। यहां वर्ष 1774 से 1939 के बीच जनजातीय समुदायों द्वारा किए गए विभिन्न विद्रोहों और स्वतंत्रता आंदोलनों को 16 गैलरियों में प्रदर्शित किया गया है। संग्रहालय का निर्माण करीब 9.75 एकड़ भूमि में किया गया है और इसका लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 नवंबर 2025 को किया था।
संग्रहालय में जनजातीय जीवनशैली और संस्कृति के साथ बाहरी हस्तक्षेप के कारण हुए संघर्षों को अलग-अलग माध्यमों से प्रस्तुत किया गया है। यहां जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन, उनके संघर्ष, सामाजिक परिस्थितियों और अंग्रेजी शासन के खिलाफ अपनाई गई रणनीतियों को डिजिटल माध्यम से भी समझाया गया है। इसका उद्देश्य केवल इतिहास को प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि युवाओं और विद्यार्थियों को उन नायकों के योगदान से परिचित कराना भी है, जिनका स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान रहा।
संग्रहालय की गैलरियों में कोई (कोया) क्रांति 1859, लिंगागिरी क्रांति 1856, रेस्ट एरिया तथा रानी चो-रिस 1878 जैसे विभिन्न जनजातीय आंदोलनों का विवरण दिया गया है। चित्रों, मूर्तियों, दस्तावेजों और डिजिटल तकनीक के माध्यम से इन संघर्षों की घटनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है। इनमें जंगल, जमीन और पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के लिए अंग्रेजी शासन के विरुद्ध खड़े हुए जनजातीय समुदायों की कहानी दिखाई गई है। संग्रहालय के उद्देश्यों में जनजातीय गौरव, स्वतंत्रता, देशप्रेम, शौर्य और बलिदान की भावना को समाज के सामने लाना शामिल है। साथ ही, अध्येताओं, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन के लिए इसे अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। पीआईबी देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुंद्रियाल ने संग्रहालय को आदिवासी इतिहास और स्वतंत्रता संघर्ष की गाथाओं को आधुनिक तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बताया। इससे पहले मीडिया के दल ने पीआईबी रायपुर में उप निदेशक रमेश जय भाई से छत्तीसगढ़ भ्रमण के अनुभव साझा किए प् इस अवसर पर पीआईबी  के सहायक निदेशक सुदीप्तो कर उपस्थित रहे।

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