– महानगर में पहाड़ की यादें कराएगी ‘तेरी माया’, उत्तराखण्डी समाज से परिवार सहित पहुंचने की अपील
– ‘अपणी फिल्म, अपणी माटी, अपणा प्यार’: नालासोपारा में 25 अक्टूबर को दिखेगी उत्तराखण्डी फिल्म ‘तेरी माया’
नालासोपारा। उत्तराखण्ड की माटी, बोली-भाषा, संस्कृति और पारिवारिक रिश्तों की भावनाओं को बड़े पर्दे पर जीवंत करने वाली उत्तराखण्डी फिल्म ‘तेरी माया’ का विशेष प्रदर्शन रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को नालासोपारा पश्चिम स्थित Fun Fishta Theatre में किया जाएगा। फिल्म का शो दोपहर 2:45 बजे से शुरू होगा। ‘तेरी माया’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि प्यार, त्याग, समर्पण और पारिवारिक रिश्तों की संवेदनाओं से जुड़ी कहानी है। फिल्म के माध्यम से उत्तराखण्ड से दूर महानगरों में रह रहे प्रवासी समाज को अपनी माटी, अपनी बोली और अपनी संस्कृति से भावनात्मक रूप से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
आयोजकों के अनुसार कौपरखैराने, मीरा-भायंदर, खारघर और ठाणे में दर्शकों से मिले स्नेह और उत्साह के बाद अब फिल्म को नालासोपारा एवं आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले उत्तराखण्डी समाज के बीच प्रस्तुत किया जा रहा है।
आयोजकों ने उत्तराखण्डी प्रवासी भाई-बहनों से अपील की है कि वे अपने परिवार, मित्रों और सगे-संबंधियों के साथ फिल्म देखने पहुंचे। उनका कहना है कि अपनी फिल्म के लिए सिनेमाघर तक पहुंचना केवल मनोरंजन का हिस्सा नहीं, बल्कि अपनी बोली, संस्कृति, परंपरा और पहचान के प्रति जुड़ाव को मजबूत करने का अवसर भी है।
उन्होंने कहा कि महानगरों में रहते हुए भी पहाड़ की माटी और अपनी संस्कृति से जुड़ी भावनाएं लोगों के दिलों में जीवित हैं। ‘तेरी माया’ इसी भावनात्मक रिश्ते को पर्दे पर सामने लाने का प्रयास है। नालासोपारा में फिल्म का केवल एक विशेष शो रखा गया है और इसे सफल बनाने के लिए उत्तराखण्डी समाज से सहयोग की अपील की गई है।
विशेष प्रदर्शन:
दिनांक: रविवार, 25 अक्टूबर 2026
समय: दोपहर 2:45 बजे
स्थान: Fun Fishta Theatre, Nallasopara West
बुकिंग एवं जानकारी के लिए संपर्क:
लज्जू भट्ट — 97623 31398
मनोहर सिंह रौथाण — 81499 17183
दिनेश अंथवाल — 93240 16678
कुलदीप बंगारी — 91120 85267
वीरेन्द्र भण्डारी — 98206 33680
मुकेश रौथाण — 98193 40090
सुरेश काला — 97681 02322
अपणी फिल्म • अपणी माटी • अपणा प्यार
आयोजकों ने कहा कि परिवार सहित सिनेमाघर पहुंचकर ‘तेरी माया’ को अपना प्यार और सहयोग देना उत्तराखण्डी बोली, संस्कृति और सिनेमा के लिए महत्वपूर्ण संबल होगा।