बीज बम अभियान पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यमः डॉ. धन सिंह रावत

-कार्यक्रम में 1,050 से अधिक विद्यालयों के एक लाख से अधिक विद्यार्थी व शिक्षक वर्चुअल माध्यम से जुड़े

देहरादून। विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने राजीव गांधी नवोदय विद्यालय स्थित वर्चुअल स्टूडियो से राज्यव्यापी बीज बम अभियान का शुभारंभ किया। पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय फलदार वृक्षों के संवर्धन, जैव विविधता के संरक्षण तथा वन्यजीव-मानव संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण प्रदेश के 1,050 से अधिक विद्यालयों में किया गया, जिसमें एक लाख से अधिक छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। बीज बम संवाद कार्यक्रम-2026 के अवसर पर डॉ. रावत ने कहा कि ष्बीज बमष् अभियान केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने की महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि  स्थानीय फलदार प्रजातियों के बीजों के माध्यम से हरित आवरण बढ़ाने के साथ-साथ वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में पर्याप्त खाद्य उपलब्ध कराने का यह अद्वितीय प्रयास, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष में भी कमी आएगी।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया  कि प्रत्येक छात्र-छात्रा कम से कम दो बीज बम तैयार कर उन्हें उपयुक्त स्थानों पर रोपित करें तथा अपने परिवार और समाज को भी इस अभियान से जोड़ें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से यह अभियान जन-जन का अभियान बनेगा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रभावी परिणाम सामने आएंगे। विभागीय मंत्री डॉ रावत ने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता, सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना तथा सामुदायिक सहभागिता जैसे जीवन मूल्यों का विकास करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहकर प्रकृति, कृषि और समाज से जुड़ाव का माध्यम भी बननी चाहिए।
डॉ. रावत ने विभागीय अधिकारियों को आगामी 16 जुलाई को हरेला पर्व के अवसर पर विभाग के सभी कार्यालयों, विद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों में ष्बीज बमष् अभियान को व्यापक स्तर पर संचालित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें स्थानीय फलदार प्रजातियों के बीजों को प्राथमिकता देते हुए अधिकाधिक जनभागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इस अवसर पर उन्होंने  विद्यार्थियों से जलवायु परिवर्तन, वन संरक्षण एवं पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति जागरूक रहने तथा वन विभाग के सहयोग से संचालित संरक्षण अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग भविष्य में नियमित रूप से विशेषज्ञों के व्याख्यान आयोजित करेगा, ताकि विद्यार्थियों को उत्तराखंड की संस्कृति, लोक परंपराओं, पर्यावरण संरक्षण एवं समसामयिक विषयों की व्यापक जानकारी मिल सके। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने बीज बम अभियान को जन-जन तक पहुंचाने तथा उत्तराखंड को अधिक हरित, समृद्ध एवं पर्यावरण-अनुकूल राज्य बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम के संचालन एवं समन्वय में कंपनी के निदेशक संजय पीर, मानसी शर्मा एवं  रवि झा सहित समस्त टीम का महत्वपूर्ण योगदान एवं पूर्ण सहयोग रहा। सभी के समन्वित प्रयासों से कार्यक्रम का वर्चुअल स्टूडियो के माध्यम से प्रदेशभर के विद्यालयों में सफलतापूर्वक सीधा प्रसारण किया गया।   

बीज बम अभियान के प्रणेता द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने छात्रों को बीज बम अभियान और बीज बम बनाने की विधि छात्रों को बताई । श्री सेमवाल ने शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत  को धन्यवाद दिया कि उनके प्रयासों से शिक्षा से बीज बम अभियान जुड़ पाया।  पूर्व निदेशक लोक कला एवं निष्पादन केंद्र के प्रो डी आर पुरोहित ने कहा कि बीज बम अभियान को विद्यालयों से जोड़ना एक सुखद कार्य है। पर्वतीय विकास शोध केंद्र श्रीनगर गढ़वाल के नोडल अधिकारी डॉ अरविंद दरमोड़ा ने कहा कि शिक्षा मंत्री  की पहल पर उत्तराखंड शिक्षा विभाग के साथ बीज बम अभियान जोड़ने के लिए धन्यवाद। इस अवसर पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनोद सेमल्टी, बेसिक शिक्षा निदेशक कुंवर सिंह रावत, एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर के सेवामुक्त प्रो. डॉ. पुरोहित, द्वारिका प्रसाद सेमवाल, अरविंद दरमोड़ा, उदय गौड़, हितेश नौटियाल, डी.एस. नेगी, गोविंद जायसवाल (मुख्य शिक्षा अधिकारी, देहरादून), जेपी मैठाणी, आगाज फाउंडेशन, आशीष सेमवाल, दीपक, रणजीत जाखी, समीर रतूड़ी सहित शिक्षा विभाग के अनेक वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का  संचालन डॉ. बी.पी. मैन्दोली द्वारा किया गया।

आइए जानते हैं कैसे बनाते हैं बीज बम

उपजाऊ मिट्टी एवं अच्छी गुणवत्ता वाले कम्पोस्ट को आवश्यकतानुसार पानी मिलाकर अच्छी तरह गूंथ लें। इसके बाद उसका छोटा गोलाकार गोला बनाकर उसके भीतर स्थानीय जलवायु एवं क्षेत्र के अनुरूप दो उपयुक्त बीज रखें। तैयार बीज बमों को कम से कम चार दिनों तक छायादार स्थान पर अच्छी तरह सुखाएँ। पूरी तरह सूख जाने के बाद इन्हें पूर्व निर्धारित उपयुक्त स्थानों पर रखें या बिखेर दें। वर्षा एवं अनुकूल वातावरण मिलने पर बीज स्वतः अंकुरित होकर पौधों का रूप ले लेते हैं।

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