देहरादून। संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आशीर्वाद तथा परम पूज्या आध्यात्मिक श्रमणी आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी ससंघ के दिव्य सान्निध्य में श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर, माजरा देहरादून में नेमिकुमार का स्वागत समारोह, तिलक एवं बिनौली यात्रा बड़े भव्य एवं श्रद्धापूर्ण वातावरण में आयोजित की गई। नित्य नियम पूजन के पश्चात पूज्य गुरुमाँ ने णमोकार महामंत्र के मंगल उच्चारण के साथ धर्मसभा का शुभारंभ किया। अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि प्रत्येक श्रावक को प्रतिदिन शुद्ध वस्त्र एवं शुद्ध भावों के साथ जिनेंद्र प्रभु के दर्शन करने चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं को दिशाओं के ज्ञान सहित धार्मिक जीवन के विभिन्न पक्षों की जानकारी भी प्रदान की।
इसके पश्चात आचार्य पूज्यपाद स्वामी द्वारा रचित ‘इष्टोपदेश’ का स्पष्टीकरण करते हुए माताजी ने कहा कि केवल जप-तप करके स्वर्ग प्राप्त कर लेने से मुक्ति नहीं मिलती, क्योंकि स्वर्ग से भी वापस संसार में आना पड़ता है। जिन भावों से मोक्ष की प्राप्ति होती है, उन्हीं भावों से देवपद भी सहज ही प्राप्त हो जाता है। इसलिए साधक को देवगति में रुकने के बजाय मोक्ष की प्राप्ति का पुरुषार्थ करना चाहिए।
उन्होंने देवगति और मोक्ष के सुख का अंतर समझाते हुए कहा कि देवगति में इंद्रियजन्य सुख होता है, जो आकुलता से भरा हुआ है और लंबे समय तक भोगा जाता है, जबकि मोक्ष का सुख अतुलनीय, असीम और निरंतर नवीन है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहला लड्डू अच्छा लगता है, लेकिन यदि लगातार सौ लड्डू खाने पड़ें तो वही सुख दुःख का कारण बन जाता है। इसी प्रकार इंद्रिय सुख वास्तव में स्थायी सुख नहीं है। माताजी ने कहा कि मोक्ष-सुख असीम है और हर पल नवीन है, जिसकी तुलना किसी सांसारिक सुख से नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा कि हे भव्यात्मा! अपनी ओर दृष्टि करो। अपना मोक्ष-सुख स्वयं के भीतर ही विद्यमान है। बाहर से सुख की भीख माँगना छोड़कर अपने आत्मस्वरूप का अवलंबन लेना चाहिए। आत्मा का सुख बार-बार अनुभव करने पर भी कभी थकान नहीं देता।
उन्होंने कहाकृ“तू ज्ञान का सागर है, हे भव्यात्मा! ज्ञान तेरे भीतर ही विद्यमान है। अपने ज्ञान को निर्भार करो, तुम्हारा अपना आनंद स्वयं प्रकट होगा।” उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि अपना सुख अपने ही पास है, इसलिए स्वर्ग-सुख में अटकने के बजाय शाश्वत मोक्ष-सुख की ओर बढ़ना चाहिए तथा स्वयं की कीमत पहचानकर स्वयं का अभिनंदन करना चाहिए। बिनौली एवं तिलक समारोह कार्यक्रम की जानकारी देते हुए मीडिया समन्वयक मधु जैन ने बताया कि 10 अगस्त को शाम 6.15 बजे पूज्य गुरुमाँ के सान्निध्य में गुरु भक्ति तथा शाम 7.30 बजे बिनौली स्वागत यात्रा आयोजित की जाएगी। बिनौली यात्रा जैन धर्मशाला से प्रारंभ होकर झंडा बाजार मंदिर जी पहुँचेगी, जहाँ तिलक समारोह होगा। इसके पश्चात तिलक रोड एवं आनंद चैक होते हुए यात्रा वापस जैन धर्मशाला में संपन्न होगी। नेमिकुमार बनने का परम सौभाग्य आदि जैन, पुत्र सचिन जैन (शक्ति विहार) को प्राप्त हुआ। वहीं कृष्ण बनने का सौभाग्य नैतिक जैन, पुत्र अमित जैन (श्रेया डेंटल, टर्नर रोड) तथा बलराम बनने का सौभाग्य मनन जैन, पुत्र अभिषेक जैन (ट्रांसपोर्ट नगर) को प्राप्त हुआ। बिनौली यात्रा मंदिर जी से प्रारंभ हुई। मार्ग में गली-मोहल्लों में निवासरत श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक स्वागत एवं तिलक किया गया। इसके पश्चात यात्रा चमन विहार की मेन लेन में प्रवेश कर चमन विहार के विभिन्न मार्गों से होते हुए पुनः मंदिर जी पहुँची। कार्यक्रम में वर्षायोग समिति के चेयरमैन राजीव जैन, दिनेश जैन, अध्यक्ष माजरा मंदिर, विनोद जैन, अध्यक्ष जैन समाज, सहित संदीप जैन, अमित जैन, मयंक जैन, प्रवीन जैन, सचिन जैन, सुनील जैन, अर्चना जैन, रजनी जैन, दीप जैन सहित बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु उपस्थित रहे और धर्मलाभ लिया। इस अवसर पर श्री विद्या-समय-पूर्ण वर्षायोग समिति तथा सकल दिगम्बर जैन समाज के अनेक गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।
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