पतिव्रता नारी सूर्य, चंद्र और नक्षत्रों की गति को भी रोक सकतीः आचार्य महामाया प्रसाद

देहरादून, गढ़ संवेदना न्यूज। सरस्वती विहार विकास समिति के तत्वाधान में शिव शक्ति मंदिर सरस्वती विहार अजबपुर खुर्द में शिव महापुराण कथा के सप्तम दिवस के अवसर पर कथा महात्म्य में आचार्य महामाया प्रसाद ने शिव महापुराण के युद्ध खंड की कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान शिव ने त्रिपुर नाम के दैत्यों को अंत किया इसलिए इन्हें त्रिपुरारी कहा गया।
पापी जलंधर की धर्मपत्नी सती वृंदा की कथा सुनाते हुए महाराज ने कहा कि जब भी भगवान शिव जलंधर का विनाश करना चाहते थे उसकी धर्मपत्नी वृंदा का सतीत्व कवच बनकर महादेव के त्रिशूल के सामने खड़ा हो जाता, महादेव इस दैत्य का संहार नहीं कर पाए फिर माता पार्वती की आज्ञा से भगवान विष्णु के द्वारा वृंदा का पतिव्रता धर्म खंडित किया गया और महादेव ने जलंधर का वध किया। अर्थात कलयुग की नारी को भी अपने पतिव्रता धर्म की शक्ति को पहचानने की आवश्यकता है, एक पतिव्रता नारी सूर्य, चंद्र और नक्षत्रों की गति को भी रोक सकती है।
भगवान शिव के द्वारा शंखचूड ,अंधक आदि दैत्यों के विनाश की कथा सुनाते हुए आचार्य महामाया प्रसाद ने कहा कि समाज में जो मनुष्य परमात्मा की दी शक्तियों (जैसे बुद्धि, विद्या,,पद,प्रतिष्ठा और बाहुबल आदि) का सद्पयोग करे वो देवता और जो शक्तियों दुरुपयोग करता है वो राक्षस कहलाता है इसलिए मनुष्य को सदैव अपनी शक्तियों का सद्पयोग करना चाहिए।
इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष पंचम सिंह बिष्ट वरिष्ठ उपाध्यक्ष बीएस चैहान उपाध्यक्ष कैलाश राम तिवारी, सचिव गजेंद्र भंडारी, मंदिर संयोजक मूर्ति राम बिज्जलवान, सह संयोजक दिनेश जुयाल, गणेश विहार विकास समिति के अध्यक्ष मुकेश चमोली, योगेश घंनसाला, विजय सिंह रावत, मंगल सिंह कुट्टी, जयप्रकाश सेमवाल,चिंतामणी पुरोहित, बसंत सिंह दफोनी, बीपी शर्मा, पीएल चमोली, आशीष गुसांईं, आचार्य उदय प्रकाश नौटियाल, आचार्य सुशांत जोशी, आचार्य अखिलेश बधानी, वेद किशोर शर्मा आदि उपस्थित रहे।

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