देहरादून। उत्तराखंड में पलायन रोकने, स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है। होमस्टे, साहसिक पर्यटन (ट्रैकिंग/पर्वतारोहण) और स्थानीय संस्कृति के प्रदर्शन के माध्यम से ग्रामीण पर्यटन को आगे बढ़ाया जा सकता है। इस दिशा में ठोक कदम उठाए जाने की जरूरत है।
उत्तराखण्ड एक पौराणिक, धार्मिक महत्व, प्राकृतिक सौंदर्य के पूर्ण एक अत्यंत सुंदर क्षेत्र है, जो प्राकृतिक सुंदरता के साथ जीवन की हलचल से दूर शांतिपूर्ण विश्राम की तलाश करने वाले पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है। खास तौर पर ग्रामीण पर्यटन और गंगा, यमुना समेत विभिन्न नदियों को संजोये पर्यटकों को बहुत आकर्षित करते हैं।
होमस्टे और स्थानीय गाइड के माध्यम से स्थानीय निवासियों की आय में वृद्धि की जा सकती है, जिससे गाँवों से पलायन रुक सके। खिर्सू, सांकरी, गैरसैंण, चिरबटिया, बूढ़ाकेदार, विनयखाल, गंगी, खैट पर्वत, नागटिब्बा, कैंपटी, धनोल्टी, माणिकनाथ, रैथल, ओसला, मतकोट, हनोल, लाखामंडल, लखवाड़, पाताल भुवनेश्वर आदि प्राचीन गुफायें, नीति, माणा, रासी, त्रिजुगीनारायण, उर्गम घाटी, बागनाथ, कौसानी, खाती, लीती समेत राज्य के विभिन्न जिलों में कई खूबसूरत गांव हैं। इन गांवों को वेलनेस और साहसिक पर्यटन के रूप में विकसित किया जा सकता है।
छोटे निवेशकों को वित्तीय सहायता और होमस्टे विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। हिमालयी चोटियों को ट्रैकिंग के लिए खोला जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों तक सुगम सड़क, बिजली और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित किए जाने की जरूरत है, ताकि पर्यटक वहां ठहर सकें। उत्तराखंड में ग्रामीण पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक आपदाओं के कारण बुनियादी ढांचे का विकास एक चुनौती है। इसके लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी के साथ सतत विकास की आवश्यकता है।
ग्रामीण पर्यटन पर लगातार ध्यान देने और लोगों को सबसे पहले रखने की जरूरत है। बुनियादी ढांचे की कमी, कौशल विकास की कमी, कमजोर मार्केटिंग और जमीनी स्तर पर तालमेल की कमी से विकास की राह रुक रही है। ग्रामीण पर्यटन रोजगार पैदा करने, उद्यमिता और सबको साथ लेकर चलने वाले आर्थिक विकास के लिए एक मुख्य स्रोत का काम कर सकता है।
गांव असली सांस्कृतिक अनुभव, पारंपरिक ज्ञान प्रणाली, क्राफ्ट और कुदरती नजारे देते हैं। ऐसी चीजें जिनकी आज के अनुभव से चलने वाले ट्रैवलर ज्यादा कीमत लगा रहे हैं जब सोच-समझकर विकास किया जाता है, तो ग्रामीण पर्यटन सांस्कृतिक और पर्यावरण एकता को बनाए रखते हुए स्थानीय लोगों के लिए रोजी-रोटी का जुगाड़ कर सकता है।
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