सड़क सुरक्षा: चिंता नहीं, चिंतन और सामूहिक कार्रवाई का विषय: पद्मश्री डॉ. संजय

-भारत में सड़क सुरक्षा एक गंभीर एवं बढ़ती हुई राष्ट्रीय चुनौती: अध्यक्ष एम्स गुवाहाटी

देहरादून: सड़क सुरक्षा माह (1 जनवरी से 31 जनवरी) के अवसर पर संजय ऑर्थोपीडिक, स्पाइन एवं मैटरनिटी सेंटर द्वारा सड़क सुरक्षा विषय पर एक विचारोत्तेजक एवं जनहितकारी वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार का उद्देश्य बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं, उनसे होने वाली मृत्यु एवं स्थायी विकलांगता, तथा उनकी रोकथाम हेतु जन-जागरूकता और सामूहिक उत्तरदायित्व की आवश्यकता को रेखांकित करना था।

इस अवसर पर देश के प्रतिष्ठित चिकित्सक एवं समाजसेवी वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। प्रमुख वक्ताओं में पद्मश्री डॉ. बी. के. एस. संजय, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर एवं अध्यक्ष, एम्स गुवाहाटी; डॉ. गौरव संजय, ऑर्थोपीडिक सर्जन, प्रख्यात लेखक एवं सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता; डॉ. एस. एन. सिंह, अध्यक्ष, देहरादून ऑर्थोपीडिक एसोसिएशन; तथा डॉ. राकेश डंगवाल, ब्रांड एम्बेसडर एवं वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे।

अपने संबोधन में पद्मश्री डॉ. बी. के. एस. संजय ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली चोटें आज के समय की सबसे गंभीर, किंतु पूर्णतः रोकी जा सकने वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक हैं। उन्होंने यातायात नियमों के कठोर पालन, हेलमेट व सीट बेल्ट जैसे सुरक्षा साधनों के नियमित उपयोग तथा जिम्मेदार सड़क व्यवहार को जीवनरक्षक बताया।

डॉ. गौरव संजय ने विशेष रूप से युवाओं और कार्यशील आयु वर्ग में सड़क दुर्घटनाओं के शारीरिक, मानसिक और आर्थिक दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समय पर उपचार, प्रभावी ट्रॉमा केयर और सतत जन-जागरूकता से न केवल जीवन बचाए जा सकते हैं, बल्कि स्थायी विकलांगता को भी काफी हद तक रोका जा सकता है।

डॉ. एस. एन. सिंह ने यातायात अनुशासन को सुदृढ़ करने तथा सड़क सुरक्षा कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं डॉ. राकेश डंगवाल ने सड़क दुर्घटनाओं से जुड़ी सामाजिक और व्यवहारगत समस्याओं को उजागर करते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा केवल किसी एक व्यक्ति या विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने नागरिकों, संस्थानों और प्रशासन से मिलकर सुरक्षित सड़कों के निर्माण हेतु ठोस प्रयास करने का आह्वान किया। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में इस बात पर सहमति व्यक्त की कि निरंतर जन-शिक्षा, सशक्त नीतिगत समर्थन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों, प्रवर्तन एजेंसियों तथा समाज के बीच समन्वित प्रयासों से ही सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में वास्तविक और स्थायी सुधार संभव है। वेबिनार का समापन इस सशक्त संदेश के साथ हुआ कि सड़कों पर जीवन बचाना केवल संकल्प नहीं, निरंतर और सामूहिक कार्रवाई की मांग करता है।