हिन्दी विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा

-डॉ.  जयंती प्रसाद नौटियाल-

विश्व में भाषाओं की रैंकिंग करनेवाली संस्था एथ्नोलोग को  2005 में भाषाओं की रैंकिंग में हिन्दी को प्रथम स्थान पर दर्शाने हेतु  उक्त शोध रिपोर्ट  को एथनोलोग को भेजा गया था लेकिन उस समय एथ्नोलोग के  15वें संस्करण का डाटा प्रकाशन हेतु फ्रीज़ हो चुका था इसलिए एथ्नोलोग के तत्कालीन संपादक पॉल लूइस  ने लिखित में आश्वासन  दिया था की इस शोध के अनुसार हिन्दी को प्रथम स्थान पर दिखाने संबंधी  शोध पर 16 वें संस्करण में विचार  किया  जाएगा । [ii]  लेकिन विविध कारणों से यह संभव न हो पाया ।

संस्थागत प्रमाणीकरण के लिए की  गई कार्रवाई :

इस शोध के पूर्ववर्ती संस्करणों का विधिवत प्रमाणीकरण कराया गया । अब तक इस शोध का 30 चरणों में प्रमाणीकरण हो चुका है । ये सभी दस्तावेज़ वैश्विक हिन्दी शोध संस्थान के पास उपलब्ध हैं ।  इस शोध के हाल ही के  संस्करणों के  संस्थागत प्रमाणीकरण के लिए यह रिपोर्ट ( शोध रिपोर्ट 2023 )   , उत्तराखंड सरकार की  भाषा एवं साहित्य की शीर्ष संस्था , उत्तराखंड भाषा संस्थान को भेजी गई । उत्तराखंड भाषा संस्थान  ने इस शोध की प्रामाणिकता का पता लगाने के लिए  विशेषज्ञ समिति  का गठन किया । इस समिति ने इसके समक्ष प्रस्तुत प्रमाणों / आंकड़ों तथा  इस शोध से संबन्धित  3328 दस्तावेजों का  अवलोकन करके प्रमाणीकरण रिपोर्ट तैयार की तथा  तथा इससे संबन्धित स्पष्टीकरणों की संपरीक्षा करके इस शोध को प्रामाणिक शोध घोषित किया । [iii]

विशेषज्ञ समिति का यह भी विचार था कि  उत्तराखंड भाषा संस्थान /उत्तराखंड शासन विद्वानो  की अन्य  समिति से उक्त शोध  का परीक्षण करने के लिए स्वतंत्र है । इस सुझाव के अनुसरण में वैश्विक हिन्दी शोध संस्थान ने कर्नाटक विश्व विद्यालय धारवाड़ , कर्नाटक को इस शोध के संस्थागत  प्रमाणीकरण हेतु उच्च स्तरीय समिति का गठन करने हेतु अनुरोध किया । कर्नाटक विश्वविद्यालय ने इस शोध के प्रमाणीकरण हेतु उच्च स्तरीय  समिति का गठन किया । इस समिति ने इस शोध का गंभीर अध्ययन एवं विश्लेषण किया और दिनांक 08-11 -2024 को  सम्पन्न उच्च स्तरीय सामिति की बैठक में इस शोध को प्रामाणिक शोध  घोषित किया । [iv]

इस शोध के नवीनतमसंक्षिप्त  संस्करण ( 21 वें संस्करण ) अर्थात शोध रिपोर्ट 2026 का भी प्रमाणीकरण दो प्रतिष्ठित संस्थाओं की इस आशय से गठित विशेषज्ञ समितियों द्वारा किया गया ।  वर्ष 2026 में जारी 2025  वर्षांत तक के आंकड़ों के अनुसार  विश्व में अँग्रेजी  के जानकार 1500 मिलियन हैं तथा चीनी  भाषा ( मंदारिन के जानकार 1200 मिलियन हैं जबकि हिन्दी के जानकार 1626 मिलियन हैं । अँग्रेजी  से 126 मिलियन अधिक हैं अर्थात 12 करोड़ 60 लाख अधिक हैं । इसलिए निर्विवाद रूप से हिन्दी विश्व में पहले स्थान पर है और विश्व में  सबसे अधिक  बोली जाने वाली भाषा है । इस शोध की प्रामाणिकता , अध्ययन एवं संदर्भ  से संबन्धित  3557 तीन हज़ार पाँच सौ सत्तावन दस्तावेज़ 13 खंडों मे  संस्थान में उपलब्ध है तथा आवश्यकता पड़ने पर संबन्धित प्राधिकारी के सम्मुख प्रस्तुत किए जाएंगे ।

लेखक का संक्षिप्त परिचय 

डॉ जयंती प्रसाद नौटियाल,का जन्म 3 मार्च 1956 को देहरादून में हुआ। डा नौटियाल, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से उप महाप्रबंधक पद से सेवा निवृत्त होकर देहरादून में निवास कर रहे हैं। डॉ नौटियाल ने अनेक राष्ट्रीय एवं विश्व कीर्तिमान स्थापित किए हैं । इन्हे विश्व का सर्वाधिक बहुमुखी प्रतिभा संपन्न व्यक्ति होने का गौरव प्राप्त है । इनका बायोडाटा (Resume) विश्व का सबसे वृहद एवं अद्वितीय है । यह  11  खंडों में है तथा 5850  पृष्ठों में है । इसमें डॉ नौटियाल की 5850  उपलब्धियां दर्ज हैं । डॉ नौटियाल ने एम ए, पी एच डी, डी लिट, एम बी ए, एल एल बी सहित 82 डिग्री/डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स किए हैं । इन्होंने 96 पुस्तकों के लेखन में योगदान दिया है,इसमे से 38 पुस्तकें स्वयं लिखी हैं , 18 पुस्तकें संयुक्त रूप से लिखी हैं , 6 पुस्तकों  का सम्पादन किया है तथा 34 पुस्तकों मे एक अध्याय लिखा है । इनकी 20 से अधिक  पुस्तकें विश्वविद्यालयों में पाठ्य पुस्तक व संदर्भ पुस्तकों के रूप में चल रही हैं। इनके 1550  लेख प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में  प्रकाशित हैं , इनहोने 129 शोध पत्र विभिन्न राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय सेमीनारों में प्रस्तुत किए हैं , जिनमें अधिकांश शोध पत्र प्रकाशित हैं । पत्रिकारिता में 113 रिपोर्ताज़  और 117 संपादकीय लिखने के अलावा 96  रेडियो / दूर दर्शन कार्यक्रम लिखे व प्रस्तुत किए हैं । 99 प्रक्रिया संबंधी  पुस्तकों का संयुक्त रूप से  अनुवाद भी किया है । इस प्रकार इन्होने  ( 96 पुस्तकें + 99 अनुवाद , +1550  लेख + 113 पत्रकारिता साहित्य + 117 संपादकीय + 129 शोध पत्र + 96 रेडियो प्रसारण  करके )  हिंदी साहित्य को 2200 रचनाओं से समृद्ध किया है । समतुल्यता के आधार पर यह 270 पुस्तकों के लेखन जितना योगदान है । ( समतुल्यता का आधार 25 लेख एक पुस्तक के बराबर )

इन्हें हिंदी भाषा और साहित्य के लिए 117 अवॉर्ड, सम्मान, और पुरस्कार मिल चुके हैं । इनके  सेवा कार्य और शोध के लिए 361 प्रशंसा पत्र प्राप्त हुए हैं । राष्ट्र की 154 शीर्ष समितियों में इन्होंने प्रतिनिधित्व किया है । इन्होने 61 शोध छात्रों  का शोध निर्देशन  किया है । इन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में 750 से अधिक व्याख्यान दिए हैं । इन्होंने 183 प्रकार के बौद्धिक कार्यों में योगदान दिया है तथा 27  प्रकार के उल्लेखनीय  कार्य सम्पन्न किए हैं । इन्हें 76  प्रकार के व्यवसायों/ पदों पर कार्य करने का अनुभव है । इनके विवरण / उद्धरण 1300 से अधिक वेबसाइटों में उपलब्ध हैं। प्रिंट मीडिया में 325   और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में 150   स्थानों पर भी  देखे जा सकते हैं । हिंदी विकिपीडिया और अंग्रेजी विकिटिया जैसे अन्य पोर्टलों पर इनके विवरण उपलब्ध हैं। डॉ नौटियाल से 9900068722 पर अथवा dr.nautiyaljp@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।