देहरादून। राजधानी देहरादून में गांधी शताब्दी चिकित्सालय में राज्यपाल गुरमीत सिंह ने एचपीवी टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया। जिससे प्रदेश-व्यापी अभियान की औपचारिक शुरुआत हुई। शुभारंभ के अवसर पर राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह अभियान राष्ट्र की बेटियों के स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में अत्यंत संवेदनशील और दूरदर्शी पहल है। राज्यपाल ने कहा कि बेटियाँ राष्ट्र का भविष्य हैं और स्वस्थ नारी ही परिवार तथा समाज की सशक्त रीढ़ होती है। उन्होंने कहा कि एचपीवी टीकाकरण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिला स्वास्थ्य सुरक्षा का एक मजबूत संकल्प है, जो सर्विकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा बड़े स्तर पर वैक्सीनेशन मिशन प्रारंभ किया गया है, जो महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल आने वाले वर्षों में महिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी। राज्यपाल ने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से इस अभियान में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के प्रथम चरण में प्रदेश भर में 155 एचपीवी टीकाकरण केन्द्रों की पहचान की गई है, जो सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में स्थित हैं। इन केंद्रों पर 14 वर्ष आयु की पात्र किशोरियों को वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर एचपीवी टीका लगाया जाएगा, जिससे संक्रमण से पूर्व अधिकतम सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस कार्यक्रम के अंतर्गत क्वाड्रिवेलेंट एचपीवी वैक्सीन (गार्डासिल) का उपयोग किया जा रहा है, जो एचपीवी वायरस के चार प्रकार के जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करती है। यह वही वैक्सीन है जिसकी निजी क्षेत्र में प्रति डोज कीमत लगभग रुपये 4,000 है, किंतु इसे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य में कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन हेतु डॉक्टरों, नर्सों एवं फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों का प्रशिक्षण पूर्ण कर लिया गया है तथा टीकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सांसद नरेश बंसल, विधायक खजान दास, सचिव स्वास्थ्य सचिन कुर्वे, मिशन निदेशक मनुज गोयल सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जिला प्रशासन, मेडिकल कॉलेजों तथा सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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