-संजय बलोदी प्रखर-
देहरादून: पूर्व राज्यपाल महाराष्ट्र व मुख्यमंत्री उत्तराखंड ,भगत सिंह कोश्यारी ने देहावसन पश्चात अपना संपूर्ण शरीर व अंगों को स्वेच्छा से दान करने का संकल्प लिया है !यह संकल्प उन्होंने विधिवत रूप से “दधीचि देहदान समिति” देहरादून उत्तराखंड पदाधिकारियों के माध्यम से देहदान का नामांकन भर किया !पूर्व राज्यपाल का जीवन अत्यंत सरल, साधना युक्त एवं संघर्ष पूर्ण रहा है !निर्धनता ,अभाव व जीवन संघर्षों से जूझते हुए भगत सिंह कोश्यारी ने महाराष्ट्र व गोवा के राज्यपाल के पद तक को सुशोभित किया! सदैव समाज व राष्ट्र हितों के लिए समर्पित कोश्यारी जी समाज के प्रत्येक वर्ग के उत्थान के लिए चिंतित व सक्रिय रहे !तत्कालीन महाराष्ट्र राज्यपाल पद पर होने के दौरान उन्होंने ट्राइबल, पिछड़े व जनजातीय समाज के रोजगार व जीवन स्तर को सुधारने हेतु कार्य किया! मूलतः उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के नामतीचेता बगड़ से आने वाले भगत सिंह कोश्यारी पूर्ण जीवन अविवाहित रहे ! जिन्हें लोग “भगत दा “से भी संबोधित करते हैं! चाहे वह आपातकाल में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 22 माह कारावास में उन्हें यातना दी गई हो या फिर उत्तराखंड अलग राज्य व उसके निर्माण का कार्य ,”भगत दा”की भूमिका महत्वपूर्ण व अग्रणी रही है !इसके अतिरिक्त भारत- नेपाल मैत्री ,उत्तराखंड में रेल परियोजना के विस्तार कार्यक्रम समिति के मुखिया, उत्तर प्रदेश में मंत्री, उत्तराखंड में मुख्यमंत्री, विधायक या सांसद प्रत्येक क्षेत्र में अपने कर्तव्यों का उन्होंने भली-भांति निर्वहन किया। विभिन्न संगठनों से जुड़ाव उनके संस्थापक,विद्यालयों के निर्माण , पत्रकारिता, शिक्षक के रूप में भी उनकी सेवा उनका राष्ट्र -समाज के प्रति एक वास्तविक उत्तरदायित्व का बोध कराती है!
अपनी आयु के 83 वर्ष में पदार्पण कर चुके भगत दा अभी भी सक्रिय हैं ! उत्तराखंड के गांव को सहकारिता, लघु उद्योग, स्वालंबन, बागवानी व कृषि के क्षेत्र में कार्यरत अनेक समूह का मार्गदर्शन कर रहे हैं! देहदान का उनका यह निर्णय समाज में एक नई चेतना व प्रेरणा का संचार उत्पन्न करेगा ! देह या अंगदान से हिचकिचाने व अनेक भ्रांतियां उत्पन्न करने वालों को यह संदेश स्पष्ट है कि मनुष्य जीवन की परिभाषा तभी पूर्ण है जब वह मनुष्य के हितों के लिए अंतिम क्षण तक कार्य करें।
निश्चित ही कोश्यारी जी का यह निर्णय भारतीय संस्कृति की उस महान परंपरा का स्मरण कराता है, जिसमें व्यक्ति अपने शरीर को भी समाज और राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित कर देता है। महर्षि दधीचि की परंपरा से प्रेरित यह संकल्प न केवल चिकित्सा विज्ञान, शोध एवं शिक्षा के क्षेत्र में उपयोगी सिद्ध होगा, बल्कि नेत्रदान एवं अंगदान के माध्यम से अनेक निराश मनुष्यों को आशा और नया प्रकाश प्रदान करेगा।
आज जब समाज में अंगदान एवं देहदान को लेकर अनेक भ्रांतियाँ व्याप्त हैं, ऐसे समय में एक वरिष्ठ, अनुभवी एवं जनप्रिय ,सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तित्व द्वारा लिया गया यह संकल्प जन-जन में विश्वास, जागरूकता एवं प्रेरणा का संचार करेगा।
समाज और युवाओं के लिए संदेश—-
“भगत दा “का यह कदम विशेष रूप से युवाओं के लिए एक सशक्त संदेश है कि सेवा केवल जीवनकाल तक सीमित नहीं होती, बल्कि मृत्यु के पश्चात भी मानवता की सेवा संभव है।
उनका यह संकल्प दर्शाता है कि सच्ची राष्ट्रसेवा और मानवसेवा वही है, जिसमें व्यक्ति अपने अस्तित्व को भी लोककल्याण के लिए समर्पित कर दे।
दधीचि देह दान समिति की प्रतिक्रिया—
इस अवसर पर दधीचि देह दान समिति, देहरादून ने पूर्व राज्यपाल कोश्यारी जी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनका यह निर्णय देहदान एवं अंगदान आंदोलन को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करेगा। समिति ने आशा व्यक्त की कि उनके इस उदाहरण से समाज के विभिन्न वर्गों—विशेषकर शिक्षित युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों—में इस पुण्य कार्य के प्रति रुचि बढ़ेगी।
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