‘नव्याने कोंकण दाखवूया’ यानि ‘फिरसे कोंकण दिखाए’ नाम की वेबिनार श्रृंखला का दूसरा वेबिनार 30 अप्रैल को 

-ऑनलाईन वेबिनार श्रृंखला में श्री.भाऊ काटदरे करेंगे समुद्री कछुए के संवर्धन पे अनमोल मार्गदर्शन

मुंबई | ‘पर्यटन निदेशालय, महाराष्ट्र’ के उपसंचालक (पर्यटन) कोंकण पर्यटन प्रादेशिक कार्यालय, नवी मुंबई ने ‘नव्याने कोंकण दाखवूया’ नाम की वेबिनार शृंखला शुरू की है | कोंकण महाराष्ट्र का बहुत ही सुन्दर, ७२० किमी समुद्रतट से सजा हुआ भौगोलिक हिस्सा है | इसके बावजूद लोगों में कोकण के बारे में बहुत कम जानकारी है | यह जानकारी सब को उपलब्ध हो इस उद्देश्य से आयोजित इस वेबिनार श्रृंखला का दूसरा वेबिनार शुक्रवार ३० अप्रैल २०२१ को शाम ४.३० बजे प्रसारित होने वाला है | श्री. भाऊ काटदरे, अध्यक्ष सह्याद्री निसर्ग मित्र, चिपळूण कछुए के संवर्धन तथा वेलास नाम के समुद्रतट पर हर साल आयोजित किए जाने वाले ‘कछुआ महोत्सव’ के बारे में बहुमूल्य जानकारी देंगे | कोकण पर्यटन प्रादेशिक कार्यालय, नवी मुंबई के अधिकृत फेसबुक पेजपर इस वेबिनार का प्रक्षेपण होगा | वेबिनार देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें –

https://www.facebook.com/Kokantourismregionaloffice

श्री भाऊ काटदरे के बारे में –

श्री भाऊ काटदरे, सह्याद्री निसर्ग मित्र, चिपळूण इस संस्था के संस्थापक है | यह संस्था १९९२ में स्थापन हुई थी | पिछले २९ साल से यह संस्था पर्यावरण संवर्धन का काम कर रही है| स्थानिक लोगों को संवर्धन कार्य में जोड़कर प्रकल्प कई सालो तक चलता रहे इस कोशिश में वह है | २००२ में उन्होंने स्थानिक लोगों के सामुदायिक प्रयत्न के आधार पर समुद्री कछुए के संवर्धन का काम शुरू किया और अब उसे काफी सफलता मिली है | भारतीय जंगाधर, सफेद पेटवाला समुद्री गरुड, गिधड, भारतीय पैंगोलिन का संवर्धन आदि अनेक प्रकल्प उन्होंने सफलता से पुरे किए है | काटदरे ‘IUCN खवले मांजर [पैंगोलिन] तज्ञ कमिटी’ तथा ‘महाराष्ट्र राज्य वन्यजीव मंडळ’ के सदस्य है |

भाऊ काटदरे इनका सातवी कक्षा के अंग्रेजी के पुस्तक में पैंगोलिन के ऊपर तथा नववी कक्षा के अंग्रेजी के पुस्तक में समुद्री कछुए पर पाठ लिखा है | बारावी कक्षा के इतिहास के पुस्तक में ‘बदलता भारत’ में भाऊ काटदरे और सह्याद्री निसर्ग मित्र के बारे में जानकारी समाविष्ट की गई है |

भाऊ काटदरे के बारे में ‘पोलादी माणसे- पोलाद उद्यमिता प्रतिष्ठान’ , ‘निसर्गपूर्ण – उर्जा प्रकाशन’, ‘खरेखुरे आयडॉल्स – युनिक फीचर्स’, ‘व्रतस्थ- चतुरंग प्रतिष्ठान प्रकाशन’ आदि पुस्तकों मे जानकारी दी गई है | कार्लझीस वन्यजीव पुरस्कार, RBS स्यांचुरी एशिया पुरस्कार, झी चौवीस तास अनन्या सन्मान, वसुंधरा मित्र पुरस्कार तथा अन्य राज्य और राष्ट्रीय पुरस्कार उन्हें प्राप्त हुए है |

श्री भाऊ काटदरेजी ने स्थानिक निवासी और वनविभाग के सहयोग से कोकणा के समुद्री तटपर समुद्री कछुए के संरक्षण का प्रकल्प सफलतापूर्वक पूरा किया | २००२ से २०१४ के बीच महाराष्ट्र में अन्य ८० जगहों पर यह प्रकल्प शुरू किया | पर्यटन से रोजगार उत्पन्न करने के लिए कछुआ महोत्सव और होमस्टे की उनकी संकल्पना काफी कामियाब रही | उस के लिए उन्होने स्थानिकों को प्रशिक्षण भी दिया | २०१४ में प्रकल्प यशस्वी होने के बाद वन विभाग व स्थानिकों पर उन्होंने उसकी जिम्मेदारी सौप दी | सफेद पीठ के गिधड के संवर्धन का प्रकल्प पूरा किया और वेंगुर्ला रॉक्स पे रहने वाली भारतीय जंगाधर के संवर्धन का प्रकल्प सफलता से पूरा किया | सिंधुदुर्ग व रत्नागिरी जिलों में समुद्री गरुड के सर्वेक्षण का प्रकल्प पूरा किया | संपूर्ण रत्नागिरी जिले में भारतीय पैंगोलिन के संरक्षण- संवर्धन का प्रकल्प पूरा किया |

श्री हनुमंत हेडे, उपसंचालक (पर्यटन), प्रादेशिक कार्यालय, नवी मुंबई इन्होने भाऊ काटदरे के बारे में कहा- “ऑलीव्ह रिडले प्रजाति के कछुओँ के संवर्धन के इस उदाहरण से कछुआ तथा अन्य पशुओं के संवर्धन के बारे में अत्यावश्यक जानकारी हमें प्राप्त होगी |”

श्री हनुमंत हेडे ने पर्यटन व्यवसाय से जुड़े व्यक्ति तथा पर्यटकों को बड़ी संख्या में इस वेबिनार में उपस्थित रहने का आवाहन किया ताकि शाश्वत पर्यटन विकास के लिए यह जानकारी दिशादर्शक होगी | वेबिनार के अंत में श्रोता अपनी समस्याएँ या प्रश्न खुल के पूछ सकते है | ऐसे वक्ता हमारे वेबिनार से जुड़ने से पर्यटन तथा पर्यटन स्थलों का निश्चित तौर पर विकास होगा|

‘नव्याने कोकण दाखवूया’ यह कोकण पर्यटन पर आधारित वेबिनार शृंखला सब के लिए विनामूल्य उपलब्ध है | दो महीने चलने वाली इस वेबिनार श्रृंखला का पहला चरण २३ अप्रैल से २८ मई तक हर शुक्रवार शाम ४.३० बजे कोकण पर्यटन प्रादेशिक विभाग के अधिकृत फेसबुक पेजपर प्रसारित किया जा रहा है |