Uttarakhand Darshan

उत्तराखंड का राज्य पुष्प ब्रह्मकमल

 ब्रह्मकमल को अलग-अगल जगहों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे उत्तरखंड में ब्रह्मकमल, हिमाचल में दूधाफूल, कश्मीर में गलगल और उत्तर-पश्चिमी भारत में बरगनडटोगेस नाम से इसे जाना जाता है। ब्रह्मकमल भारत के उत्तराखंड, सिक्किम, अरूणाचल प्रदेश, कश्मीर में पाया जाता है। भारत के अलावा यह नेपाल, भूटान, म्यांमार, पाकिस्तान में भी पाया जाता है। ब्रह्मकमल का अर्थ है ...

Read More »

यहां माता रोजाना बदलती है तीन रूप, प्रात:काल कन्या, दोपहर में युवती व शाम को वृद्धा

  देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड के रक्षक के रूप में धारी देवी को जाना जाता है। इस मंदिर में रोजाना माता तीन रूप बदलती है। वह प्रात:काल कन्या, दोपहर में युवती व शाम को वृद्धा का रूप धारण करती हैं। पौराणिक धारणा के अनुसार एक बार भयंकर बाढ़ में कालीमठ मंदिर बह गया था। लेकिन धारी देवी की प्रतिमा एक चट्टान से सटी ...

Read More »

टिहरी जिले में द्वारी गांव का प्रसिद्ध घंटाकर्ण देवता मंदिर

टिहरी, गढ़ संवेदना । टिहरी जिले में घनसाली तहसील और भिलंगना विकासखंड अंतर्गत द्वारी गांव में स्थित प्रसिद्ध घंडियाल देवता (घंटाकर्ण देवता) मंदिर में जो भी श्रद्धालू सच्चे मन से कोई मन्नत मांगता है वह मन्नत अवश्य पूरी होती है। इस मंदिर के दर्शन करने के लिए लोग दूर-दूर से यहां आते हैं। अब यह मंदिर सड़क मार्ग से जुड़ ...

Read More »

परियों का रहस्यमय देश खैट पर्वत

  देहरादून, गढ़ संवेदना न्यूज । खैट पर्वत वनदेवियों, अप्सराओंद् का प्रमुख निवास स्थल है। देवलोक से भू.लोक तक रमण करने वाली ये परियां हिमालय क्षेत्र में वनदेवियों के रूप में जानी जाती हैं। गढ़वाल क्षेत्र में वनदेवियों को आछरी.मांतरी के नाम से जाना जाता है। कठित भौगोलिक परिस्थितियों के बीच किसी प्राकृतिक आपदा व अनर्थ से बचने के लिए ...

Read More »

यह  है उत्तराखण्ड का सबसे बड़ा मंदिर समूह

 देहरादून, गढ़ संवेदना। यह राज्य का सबसे बड़ा मंदिर समूह है। देवदार के वृक्षों के बीच संकरी घाटी में स्थित है। आठवीं से दसवीं शती में निर्मित इन कलात्मक मंदिरों का निर्माण कत्यूरी राजा शालिवाहन देव ने कराया था। यहां जागनाथ, महामृत्युंजय, पंचकेदार, डंडेश्वर, कुबेर, लक्ष्मी पुष्टि देवी के मंदिर प्रमुख हैं। यहां का सबसे प्राचीन मंदिर मृत्युंजय मंदिर व सबसे विशाल ...

Read More »

Happy New Year 2020

नववर्ष 2020 की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं सुनहरे पलों की झंकार, ले कर आया नया साल। रंग बिरंगे फूलों की खुशबू, ले कर आया नया साल। उमंगों का अनमोल उपहार, ले कर आया नया साल। उम्मीदों का नया सवेरा, ले कर आया नया साल।  

Read More »

भेड़ पालन को लाभकारी बनाने की दिशा में उठाया कदम, आस्ट्रेलिया से मंगाई गई 240 मेरिनो भेड़

-राजकीय भेड़ प्रजनन प्रक्षेत्र कोपडधार घनसाली टिहरी में रखा जाएगा इन भेड़ों को देहरादून। उत्तराखंड में भेड़ पालन को लाभकारी व्यवसाय बनाने के उद्देश्य से आस्ट्रेलिया से 240 मेरिनो भेड़ मंगाई गई हैं। ये भेड़ राजकीय भेड़ प्रजनन प्रक्षेत्र कोपड़धार, घनसाली टिहरी में रखी जा रही हैं। राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना के तहत प्रदेश को यह भेड़ें मिली हैं। ऑस्ट्रेलिया ...

Read More »

पाताल भुवनेश्वर गुफा: 33 कोटि देवता निवास करते हैं यहां

देहरादून। पाताल भुवनेश्वर गुफा किसी आश्चर्य से कम नहीं है। इसके रास्ते में दिखाई देती हैं धवल हिमालय पर्वत की नयनाभिराम नंदा देवी, पंचचूली, पिंडारी, ऊंटाधूरा आदि चोटियां। प्राचीनतम ग्रन्थ स्कन्द पुराण में वर्णित पाताल भुवनेश्‍वर की गुफ़ा के सामने पत्थरों से बना एक-एक शिल्प तमाम रहस्यों को खुद में समेटे हुए है। ऐसा माना जाता है कि यहां 33 ...

Read More »

महासू देवता मंदिर: राष्ट्रपति भवन से आती है यहां नमक की भेंट

देहरादून। महासू देवता भगवान शिव के रूप हैं। महासू देवता जौनसार बावर क्षेत्र के ईष्ट देव हैं। यहां हर साल दिल्ली से राष्ट्रपति भवन से नमक की भेंट आती है। महासू देवता मंदिर हनोल में आस्‍था और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिलता है। 9वीं शताब्दी में बनाया गया महासू देवता का मंद‌िर काफी प्राचीन है। मिश्रित शैली की स्थापत्य कलामंदिर में ...

Read More »

बूढ़ाकेदार: सबसे प्राचीन केदार

देहरादून। बूढ़ाकेदार सबसे प्राचीन केदार है। जब सड़क सुविधा नहीं थी, तब केदारनाथ धाम पहुंचने का यही पैदल मार्ग था और केदारनाथ धाम की यात्रा से पहले बूढ़ा केदार के दर्शन जरूरी थे। बूढ़ा केदार धाम बाल गंगा व धर्म गंगा नदी के मध्य स्थित है। पुराणों में उल्लिखित है कि गोत्र हत्या से मुक्ति पाने के लिए पांडव जब इस ...

Read More »