Uttarakhand Darshan

सुरकुट पर्वत पर स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां सुरकंडा का मंदिर

 टिहरी।  सुरकुट पर्वत पर प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां सुरकंडा का मंदिर स्थित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार यहां सती का सिर गिरा था। जब राजा दक्ष ने कनखल में यज्ञ का आयोजन किया तो उसमें भगवान शिव को नहीं बुलाया गया, लेकिन शिव के मना करने पर भी सती यज्ञ में पहुंच गई। वहां दूसरे देवताओं की तरह उसका सम्मान नहीं ...

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द्रोणनगरी में बाबा विश्वनाथ मां जगदीशिला डोली यात्रा का हुआ स्वागत, लोगों ने लिया आशीर्वाद

देहरादून। बाबा विश्वनाथ-मां जगदीशिला डोली यात्रा शनिवार को द्रोणनगरी देहरादून पहुंची। यहां डोली यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। नगरनिगम कार्यालय परिसर में विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने डोली यात्रा पर माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस दौरान लोगों ने बड़ी संख्या में बाबा विश्वनाथ व मां जगदीशिला से आशीर्वाद प्राप्त किया। बाबा विश्वनाथ मां जगदीशिला की 20 वीं डोली यात्रा ...

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वसुधारा जल प्रपात: इस जलप्रपात के पानी का छींटा मात्र पड़ने से भी दूर हो जाते हैं विकार

देेहरादून। देश के अंतिम गांव माणा से पांच किमी दूर समुद्रतल से 13500 फीट की ऊंचाई पर एक अद्भुत जल प्रपात (झरना) है। जिसे शास्त्रों में वसुधारा नाम से जाना जाता है। 400 फीट की ऊंचाई से गिर रहे इस झरने की खूबसूरती सम्मोहित करने वाली है। ऐसा प्रतीत होता है, जैसे पहाड़ी से फेन उठ रहा हो। इतनी ऊंचाई ...

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बाबा विश्वनाथ व मां जगदीशिला की 20वीं डोली रथयात्रा 18 मई से 12 जून तक उत्तराखंड भ्रमण पर

देहरादून, गढ़ संवेदना न्यूज नेटवर्क। विश्वनाथ व मां जगदीशिला डोली रथयात्रा पर्यटन विकास समिति विशोन पर्वत ग्यारह गांव हिंदाव टिहरी गढ़वाल द्वारा आयोजित की जाने वाली बाबा विश्वनाथ व मां जगदीशिला की 20वीं डोली रथयात्रा 18 मई से शुरू होगी। यह 26 दिवसीय डोली यात्रा 12 जून तक चलेगी। डोली यात्रा उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में 10 हजार पांच ...

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न्याय की गुहार करते हैं भक्त इस मन्दिर में

 हनोल स्थित प्रसिद्ध महासू देवता मंदिर मिश्रित शैली की स्थापत्य कला को संजोए है। यह मंदिर देहरादून से 190 किमी और मसूरी से 156 किमी दूर स्थित है। यह मंदिर हनोल गांव में टोंस नदी के पूर्वी तट पर स्थित है। महासू देवता के मंदिर के गर्भ गृह में भक्तों का जाना मना है। केवल मंदिर का पुजारी ही मंदिर ...

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मां ने बेटे के साथ नौवीं कक्षा में लिया एडमिशन

देहरादून। कहते हैं पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। यदि मन में कुछ करने का जुनून और दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो उम्र राह में बाधा नहीं बन सकती। यह साबित कर दिखाया है देहरादून जिले के अंतर्गत सुदूरवर्ती त्यूनी की सरनाड पानी गांव निवासी 35 वर्षीय रेखा ने। रेखा के दो बच्चे हैं उसका बेटा संदीप जीआईसी त्यूणी में नौवीं ...

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नैनीताल में पानी न मिलने पर ऋषि अत्री, पुलस्‍त्‍य और पुलह ने मानसरोवर झील से लाकर भरा था यहां पानी

देहरादून। नैनी झील नैनीताल का मुख्‍य आकर्षण है। इस खूबसूरत झील में नौकायन का आनंद लेने के लिए लाखों देशी-विदेशी पर्यटक यहाँ आते हैं। झील के पानी में आसपास के पहाड़ों का प्रतिबिंब दिखाई पड़ता है। रात के समय जब चारों ओर बल्‍बों की रोशनी होती है तब तो इसकी सुंदरता और भी बढ़ जाती है। झील के उत्‍तरी किनारे को ...

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विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी, रामायण काल में हनुमान जी संजीवनी बूटी की खोज में पहुंचे थे इस घाटी में

देहरादून। फूलों की घाटी को वर्ष 2005 में विश्व धरोहर समिति द्वारा विश्व की धरोहरों की सूची में शामिल किया गया। इस घाटी का पता सबसे पहले ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रैंक एस स्मिथ और उनके साथी आर एल होल्डसवर्थ ने लगाया था, जो संयोग से 1931 में अपने कामेट पर्वत के अभियान से लौट रहे थे। इसकी बेइंतहा खूबसूरती से प्रभावित ...

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हर्षिलः प्रकृति की एक सुंदर उपत्यका

प्रकृति की एक सुंदर उपत्यका हर्षिल। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता है। घाटी के सीने पर भागीरथी का शान्त और अविरल प्रवाह हर किसी को आनन्दित करता है। पूरी घाटी में नदी-नालों और जल प्रपातों की भरमार है। हर कहीं दूधिया जल धाराएं इस घाटी का मौन तोडने में डटी हैं। नदी झरनों के सौंदर्य के साथ-साथ इस ...

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बूढ़ाकेदार: सबसे प्राचीन केदार

बूढ़ाकेदार सबसे प्राचीन केदार है। जब सड़क सुविधा नहीं थी, तब केदारनाथ धाम पहुंचने का यही पैदल मार्ग था और केदारनाथ धाम की यात्रा से पहले बूढ़ा केदार के दर्शन जरूरी थे। बूढ़ा केदार धाम बाल गंगा व धर्म गंगा नदी के मध्य स्थित है। पुराणों में उल्लिखित है कि गोत्र हत्या से मुक्ति पाने के लिए पांडव जब इस ...

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