Uttarakhand Darshan

सतोपंथ तालः इस ताल के तीनों कोणों में की थी ब्रह्मा, विष्णु व महेश ने तपस्या

सतोपंथ तालः उत्तराखंड के चमोली जिले में बदरीनाथ से करीब 21 किमी उत्तर-पश्चिम दुर्गम पहाड़ी में समुद्रतल से लगभग 1334 मीटर ऊंचाई पर स्थित इस ताल/झील के तीन कोण हैं। मान्यता है कि इन तीनों कोणों में ब्रह्मा, विष्णु व महेश ने तपस्या की थी। पांडव इसके पास स्थित स्वर्गरोहिणी शिखर से स्वर्ग गए थे। इस झील के पास सूर्यकुंड ...

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पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण पंवाली कांठा

पंवाली कांठा हिमाच्छादित पहाड़ियों के मध्य मखमली बुग्यागी (स्पंज घास) में करीब 4 किमी फैला स्लोप रोमांच कर देने वाला है। प्रमुख खतलिंग ग्लेशियर भी इसके समीप स्थित है। ट्रेकरों के लिए तो यह स्थान आज भी पहली पंसद बना हुआ है। यदि इसको विकसित किया जाता है तो शीत क्रीड़ा के क्षेत्र में यह नया आयाम स्थापित कर सकता ...

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आइए जानते हैं गढ़वाल की ब्राहमण जातियों का इतिहास-कब, कहां से आए और मूलपुरुष

देहरादून,  (गढ़ संवेदना)। गढ़वाल में ब्राह्मण जातियां मूल रूप से तीन हिस्सो में बांटी गई है -1-सरोला, 2-गंगाड़ी  3-नाना । सरोला और गंगाड़ी 8 वीं और 9वीं शताब्दी के दौरान मैदानी भाग से उत्तराखंड आए थे। पंवार शासक के राजपुरोहित के रूप में सरोला आये थे। गढ़वाल में आने के बाद सरोला और गंगाड़ी लोगों ने नाना गोत्र के ब्राह्मणों से शादी की। सरोला ब्राह्मण के ...

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महासू देवता मंदिर: राष्ट्रपति भवन से आती है यहां नमक की भेंट

देहरादून। महासू देवता भगवान शिव के रूप हैं। महासू देवता जौनसार बावर क्षेत्र के ईष्ट देव हैं। यहां हर साल दिल्ली से राष्ट्रपति भवन से नमक की भेंट आती है। महासू देवता मंदिर हनोल में आस्‍था और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिलता है। 9वीं शताब्दी में बनाया गया महासू देवता का मंद‌िर काफी प्राचीन है। मिश्रित शैली की स्थापत्य कलामंदिर में ...

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उत्तराखंड में भगवान शिव के ज्येष्ठ पुत्र का इकलौता मंदिर

उत्तराखंड में भगवान शिव के ज्येष्ठ पुत्र का इकलौता मंदिर स्थित है। कार्तिक स्वामी मंदिर रुद्रप्रयाग जिले के पवित्र पर्यटक स्थलों में से एक है। रुद्रप्रयाग शहर से 38 किमी की दूरी पर स्थित इस जगह पर भगवान शिव के पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित एक मंदिर है। समुद्र की सतह से 3048 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। पुराण कथा ...

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जहां माता अनुसूया ने तप के बल पर त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु व महेश को शिशु रूप में कर दिया था परिवर्तित

 सती अनुसूईया महर्षि अत्री की पत्नी थी। जो अपने पतिव्रता धर्म के कारण सुविख्यात थी। पुराणों में मां अनुसूया को सती शिरोमणि का दर्जा प्राप्त है। अनसूया मंदिर के निकट अनसूया आश्रम में त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु व महेश) ने अनुसूया माता के सतीत्व की परीक्षा ली थी। यहां प्रतिवर्ष दत्तात्रेय जयंती समारोह मनाया जाता है। इस जयंती में पूरे राज्य से हजारों की संख्या में लोग ...

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उत्तराखंड के दस प्रसिद्ध मंदिर

बदरीनाथ मंदिर: जिसे बदरीनारायण मंदिर भी कहते हैं, अलकनंदा नदी के किनारे उत्तराखंड राज्य में स्थित है। यह मंदिर भगवान विष्णु के रूप बदरीनाथ को समर्पित है। यह हिन्दुओं के चार धाम में से एक धाम भी है। ऋषिकेश से यह २९४ किलोमीटर की दूरी पर उत्तर दिशा में स्थित है। ये पंच-बदरी में से एक बद्री हैं। उत्तराखंड में ...

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गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर दिखेगी उत्तराखंड की कौसानी स्थित अनासक्ति आश्रम की झांकी

देहरादून। इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में राजपथ, नई दिल्ली में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति माटामेला सिरिल रामफोसाइज की विशेष उपस्थिति में आयोजित होने वाली गणतंत्र दिवस की राष्ट्रीय परेड में उत्तराखण्ड राज्य की ओर से कौसानी स्थित “अनासक्ति आश्रम” की झांकी प्रस्तुत की जायेगी। देवभूमि उत्तराखण्ड में कौसानी, जिसकों महात्मा गांधी जी ने “भारत का स्विटरजलैण्ड” कहा था, मंे ...

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पैठाणी उत्तराखंड में भारत वर्ष का एकमात्र प्राचीनतम राहू का मंदिर

उत्तराखंड में पैठाणी के मंदिर में सदियों से राहू की पूजा होती आ रही है। पूरे भारत वर्ष में यहां राहू का एकमात्र प्राचीनतम मंदिर स्थापित है। यह मंदिर पूर्वी और पश्चिमी नयार नदियों के संगम पर स्थापित है। कोटद्वार से लगभग 150 किलोमीटर दूर थलीसैण ब्लॉक के पैठाणी गांव में स्थित इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि जब ...

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हर्षिलः प्रकृति की एक सुंदर उपत्यका

प्रकृति की एक सुंदर उपत्यका हर्षिल। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता है। घाटी के सीने पर भागीरथी का शान्त और अविरल प्रवाह हर किसी को आनन्दित करता है। पूरी घाटी में नदी-नालों और जल प्रपातों की भरमार है। हर कहीं दूधिया जल धाराएं इस घाटी का मौन तोडने में डटी हैं। नदी झरनों के सौंदर्य के साथ-साथ इस ...

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