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सुरकुट पर्वत पर स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां सुरकंडा का मंदिर

 टिहरी।  सुरकुट पर्वत पर प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां सुरकंडा का मंदिर स्थित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार यहां सती का सिर गिरा था। जब राजा दक्ष ने कनखल में यज्ञ का आयोजन किया तो उसमें भगवान शिव को नहीं बुलाया गया, लेकिन शिव के मना करने पर भी सती यज्ञ में पहुंच गई। वहां दूसरे देवताओं की तरह उसका सम्मान नहीं ...

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वसुधारा जल प्रपात: इस जलप्रपात के पानी का छींटा मात्र पड़ने से भी दूर हो जाते हैं विकार

देेहरादून। देश के अंतिम गांव माणा से पांच किमी दूर समुद्रतल से 13500 फीट की ऊंचाई पर एक अद्भुत जल प्रपात (झरना) है। जिसे शास्त्रों में वसुधारा नाम से जाना जाता है। 400 फीट की ऊंचाई से गिर रहे इस झरने की खूबसूरती सम्मोहित करने वाली है। ऐसा प्रतीत होता है, जैसे पहाड़ी से फेन उठ रहा हो। इतनी ऊंचाई ...

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न्याय की गुहार करते हैं भक्त इस मन्दिर में

 हनोल स्थित प्रसिद्ध महासू देवता मंदिर मिश्रित शैली की स्थापत्य कला को संजोए है। यह मंदिर देहरादून से 190 किमी और मसूरी से 156 किमी दूर स्थित है। यह मंदिर हनोल गांव में टोंस नदी के पूर्वी तट पर स्थित है। महासू देवता के मंदिर के गर्भ गृह में भक्तों का जाना मना है। केवल मंदिर का पुजारी ही मंदिर ...

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नैनीताल में पानी न मिलने पर ऋषि अत्री, पुलस्‍त्‍य और पुलह ने मानसरोवर झील से लाकर भरा था यहां पानी

देहरादून। नैनी झील नैनीताल का मुख्‍य आकर्षण है। इस खूबसूरत झील में नौकायन का आनंद लेने के लिए लाखों देशी-विदेशी पर्यटक यहाँ आते हैं। झील के पानी में आसपास के पहाड़ों का प्रतिबिंब दिखाई पड़ता है। रात के समय जब चारों ओर बल्‍बों की रोशनी होती है तब तो इसकी सुंदरता और भी बढ़ जाती है। झील के उत्‍तरी किनारे को ...

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विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी, रामायण काल में हनुमान जी संजीवनी बूटी की खोज में पहुंचे थे इस घाटी में

देहरादून। फूलों की घाटी को वर्ष 2005 में विश्व धरोहर समिति द्वारा विश्व की धरोहरों की सूची में शामिल किया गया। इस घाटी का पता सबसे पहले ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रैंक एस स्मिथ और उनके साथी आर एल होल्डसवर्थ ने लगाया था, जो संयोग से 1931 में अपने कामेट पर्वत के अभियान से लौट रहे थे। इसकी बेइंतहा खूबसूरती से प्रभावित ...

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हर्षिलः प्रकृति की एक सुंदर उपत्यका

प्रकृति की एक सुंदर उपत्यका हर्षिल। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता है। घाटी के सीने पर भागीरथी का शान्त और अविरल प्रवाह हर किसी को आनन्दित करता है। पूरी घाटी में नदी-नालों और जल प्रपातों की भरमार है। हर कहीं दूधिया जल धाराएं इस घाटी का मौन तोडने में डटी हैं। नदी झरनों के सौंदर्य के साथ-साथ इस ...

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बूढ़ाकेदार: सबसे प्राचीन केदार

बूढ़ाकेदार सबसे प्राचीन केदार है। जब सड़क सुविधा नहीं थी, तब केदारनाथ धाम पहुंचने का यही पैदल मार्ग था और केदारनाथ धाम की यात्रा से पहले बूढ़ा केदार के दर्शन जरूरी थे। बूढ़ा केदार धाम बाल गंगा व धर्म गंगा नदी के मध्य स्थित है। पुराणों में उल्लिखित है कि गोत्र हत्या से मुक्ति पाने के लिए पांडव जब इस ...

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पाताल भुवनेश्वर गुफा: 33 कोटि देवता निवास करते हैं यहां

देहरादून। पाताल भुवनेश्वर गुफा किसी आश्चर्य से कम नहीं है। इसके रास्ते में दिखाई देती हैं धवल हिमालय पर्वत की नयनाभिराम नंदा देवी, पंचचूली, पिंडारी, ऊंटाधूरा आदि चोटियां। प्राचीनतम ग्रन्थ स्कन्द पुराण में वर्णित पाताल भुवनेश्‍वर की गुफ़ा के सामने पत्थरों से बना एक-एक शिल्प तमाम रहस्यों को खुद में समेटे हुए है। ऐसा माना जाता है कि यहां 33 ...

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उत्तराखंड के इस  गांव में वर्जित है हनुमानजी की पूजा

 देहरादून। उत्तराखंड के इस  गांव में हनुमानजी की पूजा वर्जित है। इस गांव के लोग हनुमान जी की पूजा नहीं करते हैं। इस गांव के लोग हनुमानजी से नाराज हैं।द्रोणागिरी पर्वत के एक हिस्से को हनुमानजी संजीवनी बूटी के लिए उठा ले गए थे। चमोली जिले के जिस द्रोणागिरी पर्वत के एक हिस्से को हनुमान जी संजीवनी बूटी के लिए उठा ...

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आाइए जानते हैं भारतीय दण्ड संहिता की कुछ प्रमुख धाराओं के बारे में

भारतीय दण्ड संहिता  भारत के अन्दर (जम्मू एवं काश्मीर को छोड़कर) भारत के किसी भी नागरिक द्वारा किये गये कुछ अपराधों की परिभाषा व दण्ड का प्रावधान करती है। किन्तु यह संहिता भारत की सेना पर लागू नहीं होती। जम्मू एवं कश्मीर में इसके स्थान पर रणबीर दण्ड संहिता (RPC) लागू होती है।      – धारा २९९ आपराधिक मानव वध ...

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