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थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत अपने ननिहाल थाती गांव पहुंचे, बचपन की यादों को किया ताजा

उत्तरकाशी। थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत शुक्रवार को 15 साल बाद अपने ननिहाल (ममकोट) थाती गांव पहुंचे। गांव की पगडंडियों से गुजरते हुए सेनाप्रमुख ने अपने बचपन की यादों को ताजा किया। अपने नाना के पैतृक भवन पंचपुरा में भी गए और गांव के हर ग्रामीण से बड़ी आत्मीयता मिले। जनरल बिपिन रावत के ममेरे भाई के परिवार ने ...

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पंचायत चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के लिए अधिकतम व्यय सीमा निर्धारित, लिंक क्लिक कर जानें किसके लिए कितनी

देहरादून, गढ़ संवेदना न्यूज। त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन में विभिन्न पदों हेतु चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को अधिकतम व्यय सीमा निर्धारित की गयी है।  ग्राम पंचायत सदस्य 10 हजार, प्रधान 50 हजार, सदस्य क्षेत्र पंचायत 50 हजार और सदस्य जिला पंचायत अधिकतम 1.40 लाख रुपये ही खर्च कर पाएंगे। इसके अलावा आयोग ने बीते वर्ष आय-व्यय का ब्योरा न देने वाले ...

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पपीते के पत्ते में छुपा है बहुत से रोगों का निदान, डेंगू से देता है सुरक्षा, आइए जानते हैं पपीता के पत्ते का रस पीने के फायदे,

देहरादून, गढ़ संवेदना न्यूज। पपीते के पत्ते में भी बहुत से रोगों का निदान छुपा हुआ हैं, पपीते के पत्तों से कई प्रकार के रोगों का निदान संभव है जो की अपने में काफी घटक होते हैं। जानकारी के लिए आपको बता दें की डेंगू के इलाज के लिए भी पपीते के पत्तों का उपयोग बहुत ज्यादा लाभकारी रहता हैं ...

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आयुर्वेद की अमृता है गिलोय, आइए जानते है इसके औषधीय लाभों के बारे में 

देहरादून। पिछले दिनों जब स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ा तो लोग आयुर्वेद की शरण में पंहुचे। इलाज के रूप में गिलोय का नाम खासा चर्चा में आया। गिलोय या गुडुची, जिसका वैज्ञानिक नाम टीनोस्पोरा कोर्डीफोलिया है, का आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसके खास गुणों के कारण इसे अमृत के समान समझा जाता है और इसी कारण इसे अमृता ...

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नेलांग घाटी की खूबसूरती खींच लाती है यहां पर्यटकों को

उत्तरकाशी । उत्तरकाशी जिले में स्थित नेलांग घाटी बेहद मनोरम और सुंदर है. इसकी ख़ूबसूरती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस जगह के प्रेमी विदेशी भी हैं. इस जगह की कई और ख़ासियत हैं, जिन्हें जान कर आप भी यहां घूमना पसंद करेंगे।  नेलांग घाटी की ऊंचाई समुद्र तट से 11,000 फीट ऊंची है, इस वजह ...

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आइए जानते हैं गढ़वाल की ब्राहमण जातियों का इतिहास-कब, कहां से आए और मूलपुरुष

देहरादून,  (गढ़ संवेदना)। गढ़वाल में ब्राह्मण जातियां मूल रूप से तीन हिस्सो में बांटी गई है -1-सरोला, 2-गंगाड़ी  3-नाना । सरोला और गंगाड़ी 8 वीं और 9वीं शताब्दी के दौरान मैदानी भाग से उत्तराखंड आए थे। पंवार शासक के राजपुरोहित के रूप में सरोला आये थे। गढ़वाल में आने के बाद सरोला और गंगाड़ी लोगों ने नाना गोत्र के ब्राह्मणों से शादी की। सरोला ब्राह्मण के ...

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नागतीर्थ सेम-मुखेम

नागतीर्थ सेम-मुखेम जनपद टिहरी गढ़वाल की प्रताप नगर तहसील में समुद्र तल से तकरीबन 7000 हजार फीट की ऊंचाई पर भगवान श्रीकृष्ण के नागराजा स्वरूप का मंदिर है | मन्दिर का सुन्दर द्वार 14 फुट चौड़ा तथा 27 फुट ऊँचा है। इसमें नागराज फन फैलाये हैं और भगवान कृष्ण नागराज के फन के ऊपर वंशी की धुन में लीन हैं। ...

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गुरु माणिकनाथ जी की साधना स्थली माणिकनाथ धाम डांडा

  देहरादून, गढ़ संवेदना न्यूज। गुरु माणिकनाथ धाम टिहरी जिले के कोटी फैगुल में स्थित है। यह धाम कोटी गांव के शीर्ष पर स्थित पहाड़ी माणिकनाथ डांडा के नाम से जाना जाता है। माणिकनाथ जी का एक मंदिर कोटी गांव के मध्य में स्थित चैतरा (खोली) नामक पवित्र जगह पर स्थित है, मदिर में बारह मास प्रातःकाल और संध्याकाल के ...

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परियों का रहस्यमय देश खैट पर्वत

  gadhsamvedna.com देहरादून, गढ़ संवेदना न्यूज । खैट पर्वत वनदेवियों, अप्सराओंद् का प्रमुख निवास स्थल है। देवलोक से भू.लोक तक रमण करने वाली ये परियां हिमालय क्षेत्र में वनदेवियों के रूप में जानी जाती हैं। गढ़वाल क्षेत्र में वनदेवियों को आछरी.मांतरी के नाम से जाना जाता है। कठित भौगोलिक परिस्थितियों के बीच किसी प्राकृतिक आपदा व अनर्थ से बचने के ...

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आइए जानते हैं बिष्ट जाति का गौरवशाली इतिहास

देहरादून, गढ़ संवेदना न्यूज। गढ़वाल के 52 गढ़ों में से तीन गढ़ ऐसे हैं, जिन पर बिष्ट राजपूतों का अधिपत्य था। गढ़वाल के कोल्ली गढ़ में बछवाण बिष्ट जाति के लोगों का साम्राज्य था। इसके अलावा गढ़वाल के ही गढ़कोट गढ़ को भी बिष्ट राजपूतो का गढ़ कहा जाता है। गढ़कोट गढ़ मल्ला ढांगू में स्थित है। ये गढ़ बगड़वाल ...

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