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नीलकंठ महादेव मंदिर: समुद्र मंथन का हलाहल पीने के बाद यहां किया था भगवान शिव ने आराम

देहरादून, गढ़ संवेदना। नीलकंठ महादेव मंदिर वह स्थल है, जहां समुद्र मंथन का हलाहल पीने के बाद शिव वर्षों तक आराम करते रहे। बाद में देवताओं के आग्रह पर वे कैलाश पर्वत पर वापस गए। समुद्र मंथन का गरल पीने के बाद शिव का कंठ नीला हो गया था। कई सालों तक ऋषिकेश की एक चोटी पर आराम करने के ...

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यह  है उत्तराखण्ड का सबसे बड़ा मंदिर समूह

 देहरादून, गढ़ संवेदना। यह राज्य का सबसे बड़ा मंदिर समूह है। देवदार के वृक्षों के बीच संकरी घाटी में स्थित है। आठवीं से दसवीं शती में निर्मित इन कलात्मक मंदिरों का निर्माण कत्यूरी राजा शालिवाहन देव ने कराया था। यहां जागनाथ, महामृत्युंजय, पंचकेदार, डंडेश्वर, कुबेर, लक्ष्मी पुष्टि देवी के मंदिर प्रमुख हैं। यहां का सबसे प्राचीन मंदिर मृत्युंजय मंदिर व सबसे विशाल ...

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आयुष्मान उत्तराखंड योजना में प्राइवेट अस्पतालों में 31360 मरीजों का इलाज, 15.06 करोड़ का भुुगतान

देहरादून, (गढ़ संवेदना)। अटल आयुष्मान उत्तराखंड योेजना के अन्तर्गत प्राइवेट अस्पतालों को 27 जून 2019 तक 15 करोड़ 6 लाख 14 हजार 865 रू. का भुगतान 77 अस्पतालों कोे किया गया हैै। 82 प्राइवेट अस्पतालों  मेें कुल 31360 मरीजों को भर्ती करके इलाज किया गया हैै। यह जानकारी अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना कार्यालय द्वारा सूचना अधिकार के अन्तर्गत नदीम उद्दीन ...

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बूढ़ाकेदार: सबसे प्राचीन केदार

बूढ़ाकेदार सबसे प्राचीन केदार है। जब सड़क सुविधा नहीं थी, तब केदारनाथ धाम पहुंचने का यही पैदल मार्ग था और केदारनाथ धाम की यात्रा से पहले बूढ़ा केदार के दर्शन जरूरी थे। बूढ़ा केदार धाम बाल गंगा व धर्म गंगा नदी के मध्य स्थित है। पुराणों में उल्लिखित है कि गोत्र हत्या से मुक्ति पाने के लिए पांडव जब इस ...

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उत्तराखंड का राज्य पुष्प ब्रह्मकमल

 ब्रह्मकमल को अलग-अगल जगहों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे उत्तरखंड में ब्रह्मकमल, हिमाचल में दूधाफूल, कश्मीर में गलगल और उत्तर-पश्चिमी भारत में बरगनडटोगेस नाम से इसे जाना जाता है। ब्रह्मकमल भारत के उत्तराखंड, सिक्किम, अरूणाचल प्रदेश, कश्मीर में पाया जाता है। भारत के अलावा यह नेपाल, भूटान, म्यांमार, पाकिस्तान में भी पाया जाता है। ब्रह्मकमल का अर्थ है ...

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प्राकृतिक सौंदर्यता से भरपूर मासरताल किसी रहस्य से कम नहीं

देहरादून। पर्यटक स्थल मासरताल बूढ़ाकेदार से करीब 10 किमी उत्तर की और लगभग दस हजार फीट की ऊँचाई पर स्थित है। मासरताल किसी रहस्य से कम नहीं है। करीब तेरह सौ वर्ष पूर्व मैकोटकेमर में धुमराणा शाह नाम का राजा राज्य करता था इनका एक ही पुत्र हुआ जिनका नाम था उमराणाशाह जिसकी कोई संतान न थी। उमराणाशाह ने पुत्र ...

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जेडी इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी के स्टूडेंट्स ने कपड़ो का नया रेंज किया तैयार

 -रोगन आर्ट, टेट्राक्रोमैसी, स्पेस और उसके ऑर्बिटस से प्रेरित  है कपड़ो का नया रेंज  देहरादून, gadhsamvedna.com। जेडी इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी के प्रतिभाशाली और क्रिएटिव फैशन डिजाइनिंग छात्रों ने रोगन आर्ट, टेट्रैक्रोमेसी और स्पेस और उसके ऑर्बिटस से प्रेरित होकर कपड़ो का नया कलेक्शन तैयार किया हैं। इस कलेक्शन को हाल ही में जेडी इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी द्वारा फैशन अवार्ड्स 2019 में प्रदर्शित किया ...

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वीर भड़ माधो सिंह भंडारी की अमर गाथा

  माधो सिंह भंडारी को माधो सिंह मलेथा भी कहा जाता। माधो सिंह का जन्म सन् 1595 के आस-पास उत्तराखंड राज्य के टिहरी जनपद के मलेथा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम सोणबाण कालो भंडारी था। उनकी बुद्धिमता और वीरता से प्रभावित होकर तत्कालीन गढ़वाल नरेश ने सोणबाण कालो भंडारी को एक बड़ी जागीर भेंट की थी। माधो ...

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क्वीला गांव के गढ़वाली लोक गायक सौरभ मैठाणी ने युवा दिलों में छोड़ी अपनी छाप

-मैठाणी के गुड्डू का बाबा गीत को मिले 12 लाख 52 हजार व्यूअर्स -तीन हजार से अधिक मंचों पर अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं मैठाणी -दुबई में अपनी संस्कृतिक व संस्कारों की दे चुके हैं प्रस्तुति -चार बार पीएम नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति के सामने मनवा चुके हैं लोहा -संस्कृति विभाग की ओर से मिला है ए ग्रेड का सार्टिफिकेट ...

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जहां माता अनुसूया ने तप के बल पर त्रिदवों ब्रह्मा, विष्णु व महेश को शिशु रूप में कर दिया था परिवर्तित

-इस मंदिर में जप और यज्ञ करने वालों को होती है संतान की प्राप्ति सती अनुसूईया महर्षि अत्री की पत्नी थी। जो अपने पतिव्रता धर्म के कारण सुविख्यात थी। पुराणों में मां अनुसूया को सती शिरोमणि का दर्जा प्राप्त है। अनसूया मंदिर के निकट अनसूया आश्रम में त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु व महेश) ने अनुसूया माता के सतीत्व की परीक्षा ली थी। यहां प्रतिवर्ष दत्तात्रेय जयंती समारोह मनाया ...

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