35वीं अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालय मूट कोर्ट प्रतियोगिता संपन्न, आईसीएफएआई विवि हैदराबाद विजेता

देहरादून। आईसीएफएआई विश्वविद्यालय देहरादून के सहयोग से बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित 35वीं अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालय मूट कोर्ट प्रतियोगिता संपन्न हुई।
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति मृदुला मिश्रा पटना के उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश और चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की कुलपति और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा थे। न्यायमूर्ति मृदुला मिश्रा ने कहा न्याय में देरी न्याय से वंचित रखना है। जब आप कानून का अध्ययन करने का निर्णय लेते हैं तो आपके पास बहुत सारे विकल्प उपलब्ध हैं, आप शिक्षाविदों, कॉरपोरेट, न्यायपालिका, सिविल सेवाओं में जा सकते हैं। पहली बात जो कानून से जुड़ी है, वह न्यायपालिका है और इसका मतलब केवल न्यायाधीश ही नहीं है, बल्कि न्यायाधीश और अधिवक्ता दोनों शामिल हैं। मूट कोर्ट सामान्य अदालत की नकल है। न्यायाधीश के समक्ष शिष्टाचार का पालन किया जाना चाहिए और एक वकील के रूप में आप पर क्या कर्तव्य और दायित्व लागू किए जाते हैं, यह मूट कोर्ट में भाग लेने के माध्यम से अनुभव किया जाता है।” अपना भाषण देते समय वह भावुक हो गईं और एक उदास स्वर में अपने अनुभव साझा किए कि उन्होंने पंद्रह साल की उम्र में शादी कर ली जब उन्होंने अपना मैट्रिक पूरा किया। वह खुशी से एक विवाहित जीवन जी रही थी और अचानक दुर्भाग्य के कारण उसके पति का  स्वर्गवास हो  गया, 32 साल की उम्र में उन्होंने इस कानूनी करियर में काम करने के लिए खुद को तैयार कर लिया। सिर्फ अपने समर्पण के कारण उन्होंने अपना मुकाम हासिल किया है और इस पेशे के प्रतिष्ठित और प्रसिद्ध व्यक्तित्वों में से एक बनें। मूट कोर्ट प्रतियोगिता के विजेता आईसीएफएआई विश्वविद्यालय, हैदराबाद (आईएफएचई) थे। उन्हें एक प्रमाण पत्र, ट्रॉफी और रु 20,000 रु – के साथ सम्मानित किया गया और रनर अप तमिलनाडु नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को रु 15,000 रु प्रमाण पत्र और ट्रॉफी के साथ सम्मानित किया गया।

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