सेवा सोसाइटी ने बच्चों के साथ चाचा नेहरू का जन्मोत्सव

देहरादून। सोसाइटी, फार हैल्थ, ऐजूकेशन एंड वूमैन एमपावरमेन्ट ऐवेरनेस (सेवा) जाखन द्वारा भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी की 130वीं वर्षगाठ हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। सोसाइटी, फार हैल्थ, ऐजूकेशन एंड वूमैन इमपावरमेन्ट ऐवेरनेस सेवाजाखन, देहरादून के द्वारा “बेटी बचाआंे, बेटी पढ़ाओं“ एवं “कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ“ कार्यक्रम राजकीय प्राथमिक विद्यालय राजपुर, देहरादून में आयोजित किया गया। 
सोसाइटी ने चाचा नेहरू की जयंती पर उन्हें श्रद्वा पूर्वक स्मरण करते हुए कहा कि बच्चों के प्रति पं. नेहरू के असीम स्नेह के कारण वह बच्चों में चाचा नेहरू के रूप में लोकप्रिय थे। इस अवसर पर सेवा सोसाइटी के सचिव डाॅ. प्रतीक संजय ने चाचा नेहरू जी के जीवन पर चर्चा करते कहा कि वे स्वतन्त्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री और एक अहम् स्वतन्त्रता सेनानी थे। चाचा नेहरू बच्चों से बहुत प्यार करते थे इसलिए उनकी वर्षगांठ को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने बच्चियों से कहा कि लक्ष्य निर्धारित कर मेहनत करें ताकि जीवन में आगे बढ़ सकें। साथ ही उन्होंने बेटियों को शिक्षा के प्रति अपने विचार रखते हुए लोगों को समाज के साथ कदम बढ़ाते हुए चलने की अपील की। 
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डाॅ0 सुजाता संजय ने चाचा नेहरू जी को श्रद्वा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि वे महान दार्शनिक, शिक्षाविद् व विचारक थे और देशवासियों के लिए हमेशा प्रेरणा के स्रोत बने रहेगे। उन्होंने संस्था द्वारा गरीब व असहाय बच्चों व महिलाओं के लिए स्वास्थ्य तथा शिक्षा के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यो की सराहना की। डाॅ0 सुजाता संजय ने कहा कि सेवा सोसाइटी का उद्देश्य महिलाओं व बच्चों को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है। इसके तहत संस्था पिछले दो वर्ष से देहरादून की मलिन एवं गरीब कस्बों में स्वास्थ्य शिविरों तथा जन-जागरूकता  सेमीनारों के माध्यम से लोगों को महिला स्वास्थ्य व बच्चों की शिक्षा के प्रति जागरूक करने में जुटी है। उनका मानना है कि हमें चाचा नेहरू जी के पद चिन्हों पर चलना चाहिए तथा प्रत्येक देशवासियों को अपने देश व समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियाॅ समझनी चाहिए और देश की प्रगति में सहयोग देना चाहिए। डाॅ0 सुजाता संजय ने कार्यक्रम के दौरान खेद व्यक्त करते हुऐ कहा कि कन्या भ्रूण हत्या एक जघन्य अपराध है जिसे हम सबको मिलकर रोकने की पहल करनी होगी। समाज में व्यापत इस बुराई को रोकना होगा। उन्होने चिंता जताते हुए कहा कि अगर बेटी पैदा नहीं होगी, तो बहू कहाॅ से लायेगें? इसलिए जो हम चाहते हैं वो समाज भी तो चाहता है। हम यह तो चाहते हैं कि बहू तो पड़ी-लिखी मिले, लेकिन बेटी को पढ़ाना है तो बहुत बार सोचने के लिए मजबूर हो जाते है। अगर बहू पढ़ी-लिखी चाहते है तो बेटी को भी पढ़ाना यह हमारी जिम्मेदारी बनती है। अगर हम बेटी को नहीं पढ़ायेंगे, तो बहू भी पढ़ी-लिखी नहीं मिलेगी। यह अपेक्षा करना अपने साथ बहुत बड़ा अन्याय है। डाॅ0 सुजाता संजय द्वारा संचालित सेवा सोसाइटी द्वारा बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत गरीब बच्चियों को प्रत्येक माह निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श शिविर का आयोजन किया जाता है। उन्होंने प्राधानाचार्या संध्या मल्ल को आसवासन दिया कि जब कभी भी उन्हें सेवा सोसाइटी के द्वारा स्कूल के रख-रखाव एवं पढ़ाई के लिए किसी भी चीज की जरूरत होगी वह हमेशा तत्पर रहेंगे।

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