सिद्धिदात्री माता भगवती का स्वरूप हैं कन्याएंः स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी

हरिद्वार। श्री दक्षिण काली पीठाधीश्वर महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाषानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि कन्याएं सिद्धिदात्री माता  भगवती का स्वरूप हैं। आदि काल से ही कन्याओं को देवी स्वरूपा माना जाता है। शास्त्रों में भी इसे वर्णित किया गया है। नवरात्र  साधना में भी कन्या पूजन का विषेष महत्व है। वासंतीय नवरात्रों  के समापन पर मंदिर में कन्या पूजन के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं को  संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देवी भगवती सबका कल्याण  करने वाली है। भगवती पूजन के साथ सभी कन्या पूजन भी करते  हैं। लेकिन इससे भी आगे बढ़कर किए जाने की आवष्यकता है।
कन्याओं को भी बालकों के समान शिक्षा व आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने का संकल्प नवरात्र में साधकों को लेना चाहिए। कन्याएं आगे बढ़ेगी तो समाज तेजी से प्रगति करेगा। समाज प्रगति करेगा  तो देष उन्नत होगा। उन्होंने बताया कि श्री दक्षिण काली मंदिर ।में नवरात्र साधना के अलावा भी वर्ष भर विश्व कल्याण की कामना के साथ भगवती के निमित अनुष्ठान चलते रहते हैं। जिनमें देष भर से  साधु सम्मिलित होने के लिए पहुंचते है। नवरात्रों में विश्व कल्याण  एवं उत्तराखण्ड की प्रगति की कामना के लिए मां श्री दक्षिण कली से विशेष प्रार्थनाएं भी की गयी। स्वामी कैलाषानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि सच्चे मन से मां के सभी स्वरूपों की पूजा अर्चना पूर्ण विधि विधान के साथ होनी चाहिए। उन्होंने श्रद्धालु भक्तों से आह्वान करते हुए कहा कि सच्चाई पर चलते हुए मानव कल्याण में अपना योगदान प्रत्येक योगदान प्रत्येक नागरिक को सुनिष्चित करने की आवश्यकता है। सेवाभाव से ही जीवन को गति मिलती है। मां की आलोकिक शक्तियां सभी का कल्याण करती है। इस दौरान राजस्थान से आए श्रद्धालुओं द्वारा भेंट किए गए तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विमोचित दुर्गा सप्तषती ग्रंथ मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रखा गया। इस अवसर पर पंडित प्रमोद पाण्डे, बाल मुकुंदानंद ब्रह्मचारी, अंकुष शुक्ला, अनूप भारद्वाज, अनुराग वाजपेयी, पंडित षिवकुमार, आचार्य पवनदत्त मिश्र, अनिल कुमार सिंह, रामसिंह प्रमुख रुप से उपस्थित थे।

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