श्रम मन्त्री की सरपरस्ती में खरीदी गयी करोड़ों की घटिया साइकिलेंः मोर्चा

-वर्ष 2018-19 में खरीदी 6.77 करोड़ की 19825 साईकिलें
-साईकिल घटिया होने के चलते कर्मकार बेच रहे आधे दामों पर दुकानदारों को
-सरकारी धन को कमीशनखोरी के चलते लगाया जा रहा है ठिकाने
-हजारों साईकिलें बाँटी गयी फर्जी तरीके से कागजों में
विकासनगर। जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि श्रम विभाग के उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड ने टेलीकम्यूनिकेशन कन्सलटेंट्स इण्डिया लि0 से 29 मार्च को 19825 साईकिलें 6,77,73,270 रू0 में खरीदी। यह सभी साईकिलें कर्मकारों को बाॅंटने के उद्देश्य से खरीदी गयी थी। उक्त खरीदी गयी एक साईकिल की कीमत 3418ध् रू0 प्रति साईकिल है। नेगी ने हैरानी जतायी कि जो साईकिलें खरीदी गयी थी, अधिकारियों ने मोटी कमीशन हड़प कर घटिया किस्म की साईकिलें खरीदी, जिसका नतीजा ये हुआ कि कर्मकारों व मजदूरों ने आधे औने-पौने दामों में वही साईकिलें दुकानदारों को बेच दी।
 मोर्चा कार्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए नेगी ने कहा कि महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हजारों साईकिलें कागजों में हेराफेरी कर फर्जी तरीके से बॅंटवाने का भी खेल खेला गया है तथा इसी प्रकार हजारों सिलाई मशीन, सोलर, उपकरणों में भी यही खेल खेला गया। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि एटलस जैसी मजबूत साईकिल 3700ध्- रू0 तक खुदरा मूल्य में मिल रही है अगर यही साईकिलें थोक में खरीदी जायें तो 2800-3000 रू0 तक उपलब्ध हो सकती हैं। वहीं दूसरी ओर ऐसी घटिया साईकिल 3418ध्-रू0 में खरीदी गयी, अगर यही घटिया साईकिलें कोई संस्था थोक में खरीदती तो 2200-2400 रू0 में आसानी से उपलब्ध हो जाती। नेगी ने कहा कि इस गरीब प्रदेश में मन्त्री एवं अधिकारियों की मिलीभगत से प्रदेश को कर्ज में डुबोकर कमीशन खोरी का खेल खेला जा रहा है।मोर्चा सरकार से उक्त साईकिल व अन्य सामान की खरीद-वितरण की उच्च स्तरीय जाँच की माँग करता है। पत्रकार वार्ता में मोर्चा महासचिव आकाश पंवार, विजयराम शर्मा, ओ0पी0 राणा, भीम सिंह बिष्ट आदि उपस्थित रहे।

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