वन अनुसंधान संस्थान सम विवि का पांचवां दीक्षांत समारोह आायोजित, 315 छात्रों को प्रदान की गई डिग्रियां

-वनों में पर्याप्त भोजन एवं जल की उपलब्धता सुनिशित करके मानव एवं वन्य जीव टकराव को रोका जा सकताः प्रकाश जावड़ेकर 
 
देहरादून,  गढ़ संवेदना न्यूज। वन अनुसंधान संस्थान एफआरआई सम यूनिवर्सिटी के पांचवें दीक्षांत समारोह में वानिकी का अध्ययन कर रहे 315 युवा पास आउट हो गए। इनमें 253 एमएससी डिग्रीधारक छात्र जबकि 62 पीएचडी धारक हैं। शनिवार को आयोजित पांचवे दीक्षांत समारोह में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने छात्र-छात्राओं को डिग्रियां व मेडल बांटे। डिग्रियां और मेडल पाकर छात्र-छात्राओं के चेहरे खिल गए। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने पासआउट छात्र-छात्राओं से कर्तव्य निष्ठा और जनभागीदारी के साथ काम करने की अपील की। इसके अलावा लगन और कर्तव्यनिष्ठा से काम करने, कार्यों में जन की सहभागिता सुनिश्चित करने और सोशल फोरेस्ट्री को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लैंटाना (घास) का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसके साथ चीड़ से भी खतरा हो रहा है। इसके लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है। महानिदेशक वन एवं विशेष सचिव वन एवं पर्यावरण मंत्रालय सिद्धांत दास ने जल संरक्षण पर जोर दिया। उन्होेंने कहा जल संरक्षण से झील रिचार्ज होंगे, घास उगेगी और घास उगने से जंगल में रहने वाले शाकाहारी जीवित रहेंगे। ऐसे जीवों का कुनबा बढ़ने के साथ ही बाघ और शेरों की संख्या में भी वृद्धि होगी। इस दौरान डॉ. एचएस गिनवाल सहित सभी प्रोफेसर, छात्र एवं उनके परिजन मौजूद रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने वृक्षांे की सुरक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले स्थानीय जनों को सादर नमन किया और वन एवं वन्य जीव संरक्षण में जन सहभागिता की महती भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक वानिकी, कृषि वानिकी तथा विद्यालय स्तरीय पौधशाला स्थापन जैसे कार्यक्रम देश में वनछादित क्षेत्र बढ़ाने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हें। छात्रों में वन सरंक्षण के प्रति जागरूकता एवं वृक्षों के प्रति प्रेम कि भावना जाग्रत करने हेतु विद्यालय स्तरीय पौधशाला की अहम भूमिका हो सकती है। भारत सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए श्री जावड़ेकर ने बताया कि वृक्ष उत्पादन एवं उनके उपयोग से संबन्धित नियमों को इस प्रकार सुगम बनाया जा रहा है ताकि जनसमान्य वृक्षारोपण के प्रति अधिक से अधिक उन्मुख हो सके। विगत वर्षों में किया गए प्रयासों के फलस्वरूप वनछादित क्षेत्र में 15,000 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गयी हें। इस संदर्भ में बास का उदाहरण देते हुए उन्हांेने पेड़ लगाओ-पेड़ बढ़ाओ- पेड़ का उपयोग करो का नारा दिया। उन्होंने यह भी कहा की वनों में पर्याप्त भोजन एवं जल की उपलब्धता सुनिशित कर के मानव एवं वन्य जीव टकराव को रोका जा सकता है। उन्हांेने उपाधि प्राप्त छात्रों से आधुनिक तकनीकों तथा प्रणालियों का उपयोग करते हुए अपने पारंपरिक मूल्यों के प्रति आदर रखने का आह्वान किया। 
विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने सम्बोधन में सिद्धान्त दास ने कहा कि आज हमारा देश वैज्ञानिक वन प्रबंध के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन का गवाह बना हें। पूर्व कि प्राथमिकताओं जैसे काष्ठ एवं गैर काष्ठ उपज कि जगह वन एवं वन्य जीव संरक्षण, आजीविका अर्जन एवं जल संरक्षण जैसे विषय आज ज्यादा प्रासंगिक हो गए हें। प्रधानमंत्री जल स्वावलम्बन योजना का जिक्र करते हुए उन्होने बताया कि इसके कार्यान्वयन के फलस्वरूप राजस्थान में केवल चार वर्षों में भूमिगत जल स्तर 4.2 फीट बढ़ गया हें। उन्होने बताया कि जल संरक्षण खाध्य शृंखला(फूड चेन) पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है और इस प्रकार वन्य जीव संरक्षण में प्रभावी भूमिका निभाता हैं। इस प्रयास से देश में विगत चार वर्षों के दौरान बाघों कि संख्या 2226 से बढ़कर 2967 हो गयी हें। जल संरक्षण 2.5-3.0 बिलयन टन कार्बन ेमुनमेजतंजपवद के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अत्यन्त जरूरी हें। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ॰ एस.सी. गैरोला ने अपने संबोधन में आईसीएफआरई द्वारा उठाए गए कुछ महत्वपूर्ण पहलों जैसे देश के लिए दूसरा राष्ट्रीय वानिकी अनुसंधान योजना (एनएफआरपी) तैयार करना, वानिकी विस्तार रणनीति कार्य योजना, प्ब्थ्त्म् कर्मचारियों के  क्षमता विकास हेतु मानव संसाधन विकास योजना, मंत्रालय के हरित कौशल विकास कार्यक्रम का क्रियान्वयन, राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप, वानिकी के माध्यम से 13 प्रमुख नदियों के पुनरुद्धार के लिए डीपीआर तैयार करना, राष्ट्री रणनीति 2018 आदि के बारे में बात की । उन्होंने आगे कहा कि प्ब्थ्त्म् ने भारत में वानिकी शिक्षा के परिष्करण के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा एवं अनुसंधान के दृष्टिगत ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय, कनाडा, स्वीडिश यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, स्वीडन, गोटिंगेन यूनिवर्सिटी, जर्मनी, इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट्री, नेपाल और राष्ट्रीय संस्थानों जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों एवं राष्ट्रीय संस्थानों जैसे आईसीएआर, टेरी, टाइफेक, जीआईसीए, जेडएसआई और आईआईएम, काशीपुर के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। कुलाधिपति द्वारा दीक्षांत समारोह के औपचारिक समापन की घोषणा की गयी। डॉ. एच. एस. गिन्वाल, डीन, एफआरआई सम विश्वविद्यालय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ समारोह का समापन हुआ।
ए.एस. रावत, कुलपति एफआरआइ सम विश्वविद्यालय और निदेशक, एफआरआई ने गणमान्य अतिथियों, विशेष आमंत्रित सदस्यों, छात्रों और उनके अभिभावकों और सभी उपस्थित जनों का स्वागत किया और विश्वविद्यालय की रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसमें विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और वानिकी और संबंधित क्षेत्रों की चुनौतियों पर आधारित कार्य योजना के साथ ही साथ भविष्य की प्रतिबद्धताओं का उल्लेख किया गया। श्री रावत ने छात्रों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने और ज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान हेतु विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। समारोह के दौरान वानिकी के विभिन्न विषयों में 62 पीएचडी और 253 एमएससी सहित कुल 315 उपाधियाँ प्रदान की गईं। इनके अतिरिक्त, एमएससी कोर्स मे उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कुल नौ छात्रों जिनमे निधि, ओद्रिला बसु, शबनम बंद्योपाध्याय (वानिकी)य अजीन शेखर, मितिनम जमो (पर्यावरण प्रबंधन)य प्रिया बिष्ट, सुब्रत पाल (काष्ठ विज्ञान और प्रौद्योगिकी)य विजया कुमार, गुरसिमरन कौर बग्गा (सेलुलोज और पेपर टेक्नोलॉजी) को स्वर्ण पदक दिए गए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*