राजधानी देहरादून में दीपावली पर पटाखों ने हवा में घोला जमकर जहर 

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में दिवाली की रात वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। दून की स्वच्छ माने जाने वाली आवोहवा में जमकर जहर घोला। अन्य शहरों की अपेक्षा देहरादून को आज भी स्वच्छ आवोहवा के हिसाब से आइडियल माना जाता है, लेकिन दीपावली की रात हुई आतिशबाजी ने दून की हवाओं में जहर घोल दिया। हवा में पीएम 2.5 की मात्रा 60 माइक्रोग्राम और पीएम 10 की मात्रा 100 माइक्रोग्राम तक होने पर हवा को सांस लेने के लिए सुरक्षित माना जाता है., लेकिन दून घाटी में दीपावली की रात दस बजे तक इनकी मात्रा कई गुना बढ़ गई थी, यानि की दून की हवा सांस लेने के लिए खतरनाक हो चुकी थी। देहरादून के विभिन्न इलाकों में दिवाली पर हुई जबरदस्त आतिशबाजी से प्रदूषण का स्तर सामान्य की तुलना में दोगुना से अधिक पाया गया। दिवाली से पहले और दिवाली के दिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रदूषण को लेकर की गई जांच सामने आने के बाद शहर में दिवाली के दिन काफी प्रदूषण हुआ। सबसे ज्यादा प्रदूषित क्षेत्र दून अस्पताल व आसपास का क्षेत्र रहा। यहां पर धूल के कण से लेकर सल्फर डाईआक्साइड व नाइट्रोजन डाई आक्साइड की मात्रा काफी ज्यादा मिली। इस बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक कंपनी के जरिए शहर के अलग-अलग स्थानों में प्रदूषण की जांच करायी। दिवाली के दिन हुए काफी प्रदूषण से इतना साफ हो गया है कि शहर में बम पटाखे लोगों के खूब फोड़े, जिसके चलते धूंध भी छायी रही। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस बार प्रदूषण की थर्ड पार्टी जांच करायी। इसके लिए एक कंपनी को काम दिया गया। कंपनी ने 21 अक्तूबर से दिवाली के दिन यानी कि 27 की रात तक प्रदूषण की स्थिति का आंकलन किया। प्रदूषण की जांच नेहरू कालोनी, दून अस्पताल, रायपुर और ऋषिकेश ढालवाला क्षेत्र में की गई। इन सभी जगहों पर प्रदूषण का लेवल काफी ज्यादा मिला। दिवाली के दिन सबसे ज्यादा प्रदूषण दून अस्पताल व इसके आसपास हुआ। जिस दून अस्पताल में कई मरीज भर्ती होने के साथ ही इमरजेंसी में अपने आप को दिखाने आते हैं। ऐसे में उनके स्वास्थ्य में दिवाली के दिन बुरा प्रभाव पड़ा होगा। दिवाली पर लोगों द्वारा छोटे गये बेहताशा पटाखों की वजह से दून समेत प्रदेश के अन्य जिलों के मौसम का मिजाज बिगड़ गया है।  प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अमित पोखरियाल के मुताबिक नेहरू कालोनी में दीपावली के दिन शाम को पीएम (पार्टिकुलेट मैटर)-10 (धूल के कण) का स्तर 166 माइक्रोग्राम प्रति नार्मल क्यूबिक मीटर पाया गया। जबकि दून अस्पताल के आसपास यह स्तर 385 रिकॉर्ड किया गया, रायपुर में 249 और ढालूवाला (ऋषिकेश) में 283 माइक्रोग्राम प्रति नार्मल क्यूबिक मीटर प्रदूषण का स्तर पाया गया। प्रदूषण मानकों के मुताबिक सामान्य स्थितियों में इसकी मात्रा 100 माइक्रोग्राम प्रति नार्मल क्यूबिक मीटर होनी चाहिए। जहां तक पीएम-2.5 (धूल के कण) का सवाल है तो नेहरू कालोनी में यह मात्र 72 माइक्रोग्राम प्रति नार्मल क्यूबिक मीटर, दून अस्पताल के पास 184, रायपुर में 151 और ढालूवाला में यह मात्रा 152 माइक्रोग्राम प्रति नार्मल क्यूबिक मीटर मापी गई। जबकि सामान्य स्थितियों में यह 60 माइक्रोग्राम प्रति नार्मल क्यूबिक मीटर होना चाहिए। जहां तक सल्फर डाईआक्साइड (एसओ-2) का सवाल है तो नेहरू कालोनी में यह 34 माइक्रोग्राम प्रति नार्मल क्यूबिक मीटर, दून अस्पताल के पास 36.3, रायपुर में 31.6 और ढालूवाला में इसकी मात्रा 43.5 माइक्रोग्राम प्रति नार्मल क्यूबिक मीटर मापी गई है। 

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