डा. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का आचार्य से मानव संसाधन विकास मंत्री बनने का सफर

देहरादून, (गढ़ संवेदना)। डा. रमेश पोखरियाल निशंक की जिंदगी काफी उतार चढ़ावों से भरी रही है। सरस्वती शिशु मंदिर के आचार्य से राज्य का मुख्यमंत्री और फिर केंद्रीय मंत्री बनने की ये यात्रा बेहद अलहदा है। 1982-83 में वे सरस्वती शिशु मंदिर उत्तरकाशी में आचार्य रहे। शिक्षण में निपुण लेकिन सबसे बड़ा गुण यह कि वह अपने छात्रों के घर जाकर उनकी शिक्षा और रुचि को लेकर अभिभावकों से संवाद करते थे। उसके बाद वे जोशीमठ स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में प्राचार्य रहे। बतौर शिक्षक अपने करियर की शुरुआत कर निशंक ने इसके बाद साहित्य, पत्रकारिता, फिर राजनीति में कदम रखा और सफलता के तमाम सोपान तय करते हुए इस मुकाम तक पहुंचे।
आज वही रमेश पोखरियाल निशंक केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री के रूप में देश की शिक्षा व्यवस्था की बागडोर अपने हाथों में संभाले हुए हैं। वो जीवन के शुरुआती दिनों से संघ से जुड़े रहे। आरएसएस का स्वयंसेवक होने के साथ-साथ उन्हें शिक्षक की दो-दो जिम्मेदारियां संभालनी होती थीं। अध्यापन के काम के दौरान निशंक समाज सेवा में सक्रिय रहे और इसके बाद राजनीति से जुड़ गए। राजनीति में उनके कदम जमें तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। अस्सी के दशक में निशंक उत्तराखंड राज्य के संघर्ष समिति के केंद्रीय प्रवक्ता बनें। 1991 में वे पहली कर्णप्रयाग विधानसभा से निर्वाचित हुए और उत्तर प्रदेश विधानसभा में पहुंचे। वे इस सीट पर 1993 और 1996 में भी चुनाव जीते। साल 1991 में पहली बार कर्णप्रयाग सीट से उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य बने। कर्णप्रयाग सीट दिग्गज कांग्रेस नेता डॉ. शिवानंद नौटियाल की थी, वह नजदीकी रिश्तेदार भी थे। अपने परिवार के विरोध के बाद भी उनके खिलाफ चुनाव मैदान में उतरा और जीत दर्ज की। यह जिंदगी का दूसरा अहम पड़ाव था और यहीं से राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई। इसके बाद साल 1991 से 2012 तक वो यूपी और उत्तराखंड में 5 बार विधायक बने। साल 2009 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद भुवन चन्द्र खंडूरी को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा और इसके बाद निशंक उत्तराखंड के पांचवें सीएम बन गए। 2012 में निशंक देहरादून के डोईवाला से विधायक बने। इसके बाद 2014 में हरिद्वार से सांसदी का चुनाव लड़ने के लिए विधायकी छोड़ दी। एक बार फिर 2019 में बीजेपी ने उन पर भरोसा जताया और वो जीतकर आए। अब वो देश के मानव संसाधन विकास मंत्री बने हैं।
2019 के लोकसभा चुनाव में हरिद्वार से रमेश पोखरियाल सांसद चुने गए हैं। यहां उन्होंने कांग्रेस के अम्बरीष कुमार को हराया। रमेश पोखरियाल ने अम्बरीष कुमार को 258729 वोटों से मात दी। 2014 में भी रमेश पोखरियाल ने इस सीट से जीत हासिल की थी।
रमेश पोखरियाल निशंक पहली बार केंद्र में मंत्री बनाए गए हैं। इससे पहले वो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। निशंक पहली बार 1999 में यूपी में कल्याण सिंह की सरकार में मंत्री बने थे। साल 2000 में उत्तराखंड के गठन के बाद वह 12 विभागों के मंत्री बनाए गए थे। जिनमें वित्त और राजस्व जैसे अहम मंत्रालय शामिल थे।

अत्यंत गरीबी में गुजरा बचपन
डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक का बचपन अत्यंत गरीबी में गुजरा। पौड़ी गढ़वाल जिले के पिनानी गांव, जहां जन्म हुआ, वहीं प्राथमिक शिक्षा ली। रोजाना 15-16 किमी पैदल पहाड़ी रास्ता तय करना पड़ता था। इस दौरान दो बार मौत से भी सामना हुआ। पहली बार एक पहाड़ी नदी में बहे, किसी तरह दूसरे गांव की महिलाओं की मदद से नदी से निकले। दूसरी बार सर्दियों में बर्फ के बीच स्कूल जाते हुए अचानक सामने बाघ आ गया। मृत्यु निश्चित मान चुपचाप खड़े रहे। पांच मिनट बाद बाघ खुद ही जंगल की ओर चला गया।

शिक्षण के बाद पत्रकारिता
शिक्षण के साथ निशंक साहित्यिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे। डॉ. शंकर दयाल शर्मा उप राष्ट्रपति थे, तब उन्होंने निशंक की पहली पुस्तक समर्पण का लोकार्पण किया। कोटद्वार की साहित्यांचल संस्था ने वर्ष 1990 के आसपास निशंक उपनाम दिया।

28 वर्ष का सक्रिय राजनीतिक जीवन
निशंक वर्ष 1991 में पहली बार कर्णप्रयाग क्षेत्र से उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए। 2012 तक पांच बार, पहले उत्तर प्रदेश और फिर उत्तराखंड विधानसभा के सदस्य रहे। 1997 व 1999 में उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री, वर्ष 2000 में अलग राज्य बनने के बाद उत्तराखंड की अंतरिम सरकार में कैबिनेट मंत्री और फिर 2007 में भी उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। वर्ष 2009 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने और इस पद पर लगभग सवा दो साल रहे। वर्ष 2014 में हरिद्वार सीट से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए और पूरे पांच साल लोकसभा की सरकारी आश्वासन समिति के सभापति के रूप में दायित्व संभाला। इस आमचुनाव में हरिद्वार से लगातार दूसरी बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए और केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्रलय जैसी अहम जिम्मेदारी मिली।

साहित्यिक सफर
1983 में निशंक की पहली कविता संग्रह समर्पण प्रकाशित हुई। अब तक 14 कविता संग्रह, 12 कहानी संग्रह, 11 उपन्यास, चार पर्यटन ग्रंथ, छह बाल साहित्य, चार व्यक्तित्व विकास सहित पांच दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। देश-विदेश में कई भाषाओं में उनके साहित्य का अनुवाद हुआ है। युगांडा, नेपाल, मॉरीशस, श्रीलंका, जर्मनी, हॉलैंड, रूस, नार्वे, जापान, इंडोनेशिया, भूटान सहित यूरोपीय देशों में सम्मान मिला है। देश-विदेश की 300 से अधिक साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा राष्ट्र गौरव, भारत गौरव, प्राइड ऑफ उत्तराखंड एवं यूथ आइकन अवार्ड दिए गए हैं।

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक-एक परिचय
पिता- स्व. परमानंद पोखरियाल
मां- स्व. विशंभरी देवी
जन्म- 15 जुलाई 1959
जन्म स्थान- पिनानी, पौड़ी गढ़वाल
शादी- 7 मई 1985
पत्नी- कुसुमकांता
शिक्षा- एमए, पीएचडी (ऑनर्स), डी. लिट(ऑनर्स), हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल यूनिवर्सिटी श्रीनगर।
साल 1991 से साल 2012 तक पांच बार यूपी और उत्तराखंड की विधानसभा पहुंचे।
साल 1991 में पहली बार उत्तर प्रदेश में कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित। जिसके बाद लगातार तीन बार विधायक बने।
साल 1997 में उत्तर प्रदेश सरकार में कल्याण सिंह मंत्रिमंडल में पर्वतीय विकास विभाग के मंत्री बने।
साल 1999 में रामप्रकाश गुप्त की सरकार में संस्कृति पूर्त व धर्मस्व मंत्री।
2000 में उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद प्रदेश के पहले वित्त, राजस्व, कर, पेयजल सहित 12 विभागों के मंत्री।
वर्ष 2007 में उत्तराखंड सरकार में चिकित्सा स्वास्थ्य, भाषा तथा विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग के मंत्री।
वर्ष 2009 में उत्तराखंड के सबसे युवा मुख्यमंत्री।
वर्ष 2012 में डोईवाला (देहरादून) क्षेत्र से विधायक निर्वाचित।
वर्ष 2014 में डोईवाला से इस्तीफा देकर हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित।
वर्ष 2019 में हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र से पुनः सांसद निर्वाचित, केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री (मानव संसाधन विकास मंत्री बने)।

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