युवाओं में बढ़ रहे गुर्दा रोग, इन पर लगाम लगाने के लिए जागरुकता बढ़ाना जरूरी: डा. आरोड़ा 

देहरादून। गुर्दे यानि किडनी का स्वस्थ होना एक व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दुर्भाग्य से पिछले कुछ सालों में गुर्दा रोगों के मरीज़ों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। दुनिया भर में 850 मिलियन लोग गुर्दा रोग से पीड़ित हैं। सीकेडी के कारण हर साल 2.4 मिलियन मौतें होती हैं। दुनिया भर में 13 मिलियन से अधिक लोग ए.के.आई एक्यूट किडनी इंजरी से पीड़ित हैं। इनमें से 85 फीसदी मामले भारत जैसे निम्न एवं मध्यम आय वर्ग वाले देशों में पाए जाते हैं। हर साल ए.के.आई के कारण लगभग 1.7 मिलियन लोगों की मुत्यु होती है।
मैक्स सुपर स्पेशलटी अस्पताल देहरादून के नेफ्रोलोजी डिपार्टमेन्ट के हेड डाॅ. पुनीत अरोड़ा ने कहा ‘कई कारणों जैसे दिल की बीमारियों, डायबिटीज़, हाइपरटेंशन, मोटापा तथा संक्रमण जैसे एचआईवी, मलेरिया, टीबी और हेपेटाइटिस के कारण व्यक्ति सीकेडी या एकेआई का शिकार हो सकता है जो आज मौतों का मुख्य कारण हैं। इसके अलावा बच्चों में सीकेडी और एकेआई की बात करें तो ये कई मामलों में मृत्यु का कारण बनते हैं, जबकि ज़्यादातर मामलों में बचपन के बाद भी कई चिकित्सकीय समस्याओं की मुख्य वजह बन जाते हैं।’’हाल में आईसीएमआर द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले साल में सीकेेडी के दो तिहाई नए मामले दर्ज किए गए, इन मामलों की संख्या में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। भारत में जीवनशैली रोगों के बढ़ने के साथ पिछले दशक में गुर्दा रोगों के मामले लगभग दोगुने हो गए हैं और आने वाले समय में इसमें और अधिक बढ़ोतरी की उम्मीद है। ‘‘आनुवंशिक कारकों  के अलावा नमक का अधिक सेवन भी हानिकारक है, जो उच्च रक्तचाप का कारण बनता है और क्रोनिक गुर्दा रोगों को जन्म दे सकता है। अक्सर गुर्दा रोगों की शुरूआत अवस्था में रोग के लक्षण दिखाई नहीं देते, ऐसे में आम जनता को खून एवं यूरीन की नियमित जांच के द्वारा गुर्दा रोगों की स्क्रीनिंग के लिए जागरुक बनना बहुत ज़रूरी है। खासतौर पर डायबिटीज़, हाइपरटेंशन से पीड़ित मरीज़ों और उन लोगों को अपनी जांच नियमित रूप से करानी चाहिए, जिनके परिवार में गुर्दा रोगों का इतिहास हो। सेहतमंद आहार न केवल आपके गुर्दों को बल्कि पूरे शरीर को स्वस्थ बनाए रख सकता है।’’ डाॅ पुनीत अरोड़ा ने कहा। सीकेडी और एकेआई कई सामाजिक कारकों पर निर्भर करते हैं, जिनमें एक व्यक्ति जन्म लेता है, बढ़ता है, रहता है और काम करता है जैसे उम्र गरीबी, लिंग असमानता, शिक्षा की कमी, व्यवसायिक खतरे और प्रदूषण आदि। गुर्दा स्वास्थ्य की बात करें तो महिलाओं को कुछ विशेष चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। भारत में पुरूषों की तुलना में महिलाओं को चिकित्सा सेवाएं कम मात्रा में उपलब्ध हो पाती हैं। गर्भावस्था के दौरान एक्यूट किडनी इंजरी की संभावना, क्रोनिक गुर्दा रोग तथा आॅटोइम्यून डिसआॅर्डर जैसे एसएलई, महिलाओं के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। अगर गर्भवती महिलाएं सीकेडी की शिकार हों, तो उनमें समयपूर्व प्रसव, हाइपरटेंशन, प्रीक्लैम्पसिया तथा सीकेडी के अडवान्स्ड अवस्था में पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है।

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