माँ की साधना से आता है विचारों में सकारात्मक बदलावः  डा. पण्ड्या

हरिद्वार। अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि यह परिवर्तन की वेला है। नवरात्र के इन दिनों में देवी माँ की आराधना से विचारों में सकारात्मक बदलाव आता है।
वे नवरात्र साधना के सातवें दिन शांतिकुंज के मुख्य सभागार में आयोजित सत्संग को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर भारत सहित अमेरिका, युक्रेन आदि देशों से नवरात्र साधना करने आये साधक उपस्थित रहे। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि मनोयोगपूर्वक की गयी नवरात्र साधना से साधक के जीवन में भगवत्सत्ता अवतरित होने लगती है। अर्थात् भगवान साधक के जीवन को ऊर्ध्वगामी बनाने के अनेक रास्ते खोलते हैं। परिवर्तन की इस वेला में ईश्वरीय सत्ता अनुदान-बरसाते हैं। साथ ही मनोयोगपूर्वक साधनारत साधकों में वैचारिक परिवर्तन भी करते हैं। उनमें रजोगुण व तमोगुण में सामंजस्य बिठाते हुए सतोगुणों की वृद्धि करते हैं। रामचरित मानस के विभिन्न चैपाइयों के माध्यम से श्रीराम की मर्यादाओं का बखान करते हुए डॉ. पण्ड्या ने भगवान श्रीराम के द्वारा स्थापित आदर्श को जीवन में उतारने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम ने तप साधना से विशिष्ट शक्तियाँ अर्जित कीं, जिससे सम्पूर्ण समाज को रावण जैसे अत्याचारियों, असुरों से मुक्त करा पाये। अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए प्रखर आध्यात्मिक चिंतक डॉ. पण्ड्या ने कहा कि मन व विचारों में पनप रहे कुविचारों को दूर करने के लिए गायत्री महामंत्र की साधना के साथ श्रेष्ठ साहित्य का नियमित अध्ययन आवश्यक है। भगवान श्रीराम, योगेश्वर श्रीकृष्ण, भगवान बुद्ध आदि अवतारों के विभिन्न उद्धरणों के माध्यम से विस्तार से प्रकाश डाला। अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख ने ‘युगावतार-प्रज्ञावतार’ पर विस्तृत जानकारी देते हुए इसे वर्तमान समय की माँग बताया। इससे पूर्व संगीत विभाग के भाइयों ने सुगम संगीत प्रस्तुत कर उपस्थित साधकों को उल्लसित कर दिया। मंच संचालन श्री नमोनारायण पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर व्यवस्थापक श्री शिवप्रसाद मिश्र सहित देश-विदेश से हजारों साधक उपस्थित रहे।

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