महात्मा गांधी की 71वीं पुण्यतिथि पर एनएसयूआई ने निकाला अहिंसा मार्च 

देहरादून। महात्मा गांधी की 71वीं पुण्यतिथि पर एनएसयूआई से जुड़े छात्र छात्राओं ने अहिंसा मार्च निकाला गया। इस अवसर पर वक्तताओ ने गांधी जी के बताए रास्ते पर चलकर का  उनके आदर्शों को जीवन मे उतारने का आह्वान किया। साथ ही  इस मौके पर संगठन की ओर से चित्रकला प्रतियोगिता का  आयोजन किया गया।
जिसमें विजेता छात्र छात्राओं को पुरुस्कार देकर सम्मानित किया गया। बुधवार को एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष मोहन भंडारी के नेतृत्व में एनएसयूआई से जुड़े छात्र छात्राएं कांग्रेस भवन में एकत्र हुए। यहाँ पर गांधी जी की मूर्ति पर माल्यर्पण कर घन्टाघर तक रैली के रूप में अहिंसा मार्च निकाला। इस मौके पर एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष मोहन भंडारी , जिला प्रभारी डिम्पल शैली, निकेंद्र नेगी, सत्यम कालरा, अक्षत भट्ट, प्रियंका बाल्मीकि, उदित थपलियाल, नरेंद्र सिंह, राजेश भट्ट, पंकज नेगी, कोमल, प्रियल ध्यानी, मिताली रावत, सोनी बिष्ट, आकाश बिष्ट, कृतिका रावत, शिवानी थापा, अंकिता नौटियाल, नीतीश, भादेहरादून। तीन माह से वेतन एवं पेंशन की धनराशि का भुगतान न होेने के कारण उत्तराखंड पेयजल निगम कर्मचारी महासंघ ने कार्य बहिष्कार करते हुए निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन कर दिया और कहा कि जल्द ही भुगतान न होने पर आर पार का आंदोलन चलाया जायेगा और इसके लिए रणनीति तैयार की जायेगी।यहां निगम मुख्यालय में महासंघ से जुडे हुए कर्मचारी प्रांतीय अध्यक्ष प्रवीन कुमार रावत के नेतृत्व में इकटठा हुए और वहां पर उन्होंने अपनी मांगों के समाधान के लिए कार्य बहिष्कार करते हुए प्रदर्शन कर धरना दिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि तीन माह से वेतन व पेंशन न मिलने के कारण पेयल निगम के सभी अधिकारियो व कर्मचारियों को आर्थिक एवं सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और पूर्व में पेयजल निगम को वेतन एवं सेन्टेज के अंतर की धनराशि का भुगतान सरकार द्वारा किये जाने के शासनादेश है इसके उपरांत भी शासन व सरकार द्वारा वेतन पेंशन का भुगतान नहीं किया जा रहा है।वक्ताओं ने कहा कि विगत तीन माह से वेतन न मिलना कार्मिकों के मौलिक अधिकारों का हनन है और शासन व सरकार को प्रत्येक दशा में कार्मिकों के वेतन व पेंशन भत्तों का भुगतान किया जाना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि अधिकारियों द्वारा कार्मिों का शोषण किया जा रहा है और उनके द्वारा कार्य बहिष्कार करते हुए अधिकारियों से मांग की गई है कि यदि उनके द्वारा कार्मिकों से कार्य कराना है तो उससे पूर्व उनका तीन माह का वेतन का भुगतान किया जाये तत्पश्चात ही कार्मिकों से काम लिया जायेगा। इस अवसर पर अनेक कर्मचारी शामिल थे।

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