पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीटः भाजपा बीसी खंडूड़ी को ही उतार सकती है चुनाव मैदान में

देहरादून। पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट पर भाजपा इस बार भी (मेजर जनरल अवकाश प्राप्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी को अपना उम्मीदवार बना सकती है। इस लोकसभा सीट पर कांग्रेस द्वारा सांसद भुवन चंद्र खंडूड़ी के बेटे मनीष खंडूड़ी को अपना उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं। भाजपा की कोशिश थी कि उम्र ज्यादा होने के कारण इस सीट पर बीसी खंडूड़ी के स्थान पर पूर्व रियर एडमिरल ओमप्रकाश राणा, कर्नल अजय कोठियाल में से किसी को उम्मीदवार बनाया जाए, लेकिन कांग्रेस के बीसी खंडूड़ी के बेटे मनीष खंडूड़ी को इस सीट पर अपना उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चाओं के बीच भाजपा सतर्क हो गई है। भाजपा यह अच्छी तरह से जानती और समझती है कि बीसी खंडूड़ी के आशीर्वाद के बिना गढ़वाल लोकसभा सीट को नहीं जीता जा सकता है। मनीष खंडूड़ी भाजपा में अपने पिता बीसी खंडूड़ी की अनदेखी और उन्हें रक्षा मामलों की  समिति के अध्यक्ष पद से हटाए जाने से नाराज हैं। 

बीसी खंडूड़ी की अध्यक्षता वाले रक्षा समिति ने अपनी रिपोर्ट में काफी चिंताओ को उठाया था। कहा गया था कि रक्षा मंत्रालय को जरूरत से काफी कम धन दिया जा रहा है। सेना के आधुनिकीकरण के लिए दिया गया बजट भी पर्याप्त नहीं है। मौजूदा संसाधन भी इतने नहीं हैं कि उन्हे संतोषजनक माना जा सकें। इस रिपोर्ट के आने कुछ समय बाद खंडूड़ी को रक्षा समिति के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। यदि मनीष खंडूड़ी को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया तो भाजपा के लिए गढ़वाल सीट जीतना आसान नहीं है। ऐसे में भाजपा इस सीट पर बीसी खंडूड़ी को ही अपना उम्मीदवार घोषित कर सकती है। जिससे मनीष खंडूड़ी इस सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार नहीं बनेंगे।

भाजपा ने गढ़वाल लोकसभा सीट के पैनल में भुवन चंद्र खंडूड़ी, तीरथ सिंह रावत, पूर्व रियर एडमिरल ओमप्रकाश राणा, कर्नल अजय कोठियाल, शौर्य डोभाल, वीरेंद्र जुयाल व शैलेंद्र नेगी के नामों को अपने पैनल में रखा है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (अप्रा) 16-वीं लोकसभा में पौड़ी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। ईमानदार छवि व कर्तव्यनिष्ठा के लिए माने जाने वाले खंडूड़ी को इस क्षेत्र की जनता ने पांचवीं बार लोकसभा में अपने प्रतिनिधि के तौर पर भेजा। बतौर सांसद उन्होंने संसद के भीतर जनअपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास किया, संसदीय क्षेत्र में सक्रिय दिखे। ये बात अलग है कि पिछले डेढ़-दो वर्षों में स्वास्थ्य कारणों के चलते भले ही वे अपने संसदीय क्षेत्र में अधिक सक्रिय न रहे हों, मगर इससे पहले वह खासे सक्रिय रहे। 84-वर्षीय खंडूड़ी ने संसद में जहां 92 फीसदी उपस्थिति दर्ज करवाई, वहीं उन्होंने इस कार्यकाल में 104 सवाल सदन में उठाए। इनमें से करीब 70 फीसद संसदीय क्षेत्र की समस्याओं से संबंधित रहे। वर्ष 2013 में केदारघाटी में आई प्राकृतिक आपदा के दौरान आपदा प्रभावित गांवों के विस्थापन का सवाल उठाया, वहीं आपदा प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का मामला भी सदन में रखा। साथ ही शिक्षा, सड़क, कृषि, उद्योग, पर्यटन से जुड़े मसलों पर सवाल पूछे। इस कार्यकाल में उन्होंने संसद में राज्य से जुड़े 12 विषयों पर बहस भी की, जिसमें उत्तराखंड के जंगलों को चीड़ को चरणबद्ध तरीके से हटाने के साथ ही प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में बैंक शाखाएं खोलने की बात शामिल रही। इसके अलावा प्रदेश में आपदा की पूर्व चेतावनी के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम, एनआईटी श्रीनगर में हुई अनियमितताओं सहित कई विषयों पर सदन में चर्चा भी की। उन्होंने पांच प्राइवेट मेंबर बिल भी सदन में रखे, जो वर्तमान में लंबित सूची में है।

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