परमार्थ निकेतन में आयोजित दिव्य श्रीमद्भागवत कथा का समापन, -स्वामी चिदानन्द सरस्वती और प्रहृलाद मोदी ने किया सहभाग

-पर्यावरण को शुद्ध रखने के मिलकर कार्य करना आवश्यकः प्रहृलाद मोदी
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के पावन गंगा तट पर दिव्य जीवन सांस्कृतिक संघ, शिवानन्द आश्रम-अहमदाबाद, गुजरात द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का आज समापन हुआ। सात दिनों से कथा व्यास स्वामी अध्यात्मानन्द जी महाराज के मुखारबिन्द से प्रवाहित हो रही ’श्रीमद् भागवत कथा’ की ज्ञानधारा प्रवाहित हो रही थी। गुजरात प्रांत सहित भारत के अन्य स्थानों से आये साधकों ने गंगा के संगीत के साथ पावन गंगा तट पर भागवत कथा को आत्मसात किया।
 कथा के समापन अवसर पर महामण्डलेश्वर स्वामी असंगानन्द जी महाराज, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कनिष्क भ्राता श्री प्रहृलाद मोदी जी और जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी ने सहभाग किया तथा देश विदेश से आये श्रद्धालुओं को पर्यावरण संरक्षण और एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करने का संदेश दिया। महामण्डलेश्वर स्वामी असंगानन्द जी महाराज ने कहा कि कथा श्रवण करना अध्यात्म जीवन में प्रवेश की कुंजी है। आध्यात्मिक होना और अध्यात्म को जानना सरल है परन्तु अध्यात्म को जीना कठिन है, पर यही जीवन जीने का सच्चा मार्ग है। उन्होने कहा कि यहां श्रवण की कथा को अपने हृदय में उतरने देना और उसके अनुरूप जीवन जीने का प्रयास करना।
   स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’भारत ऋषियों की भूमि है और उत्तराखण्ड तो माँ गंगा का उद्गम स्थल है। यहां पर दुनिया के कोने-कोने से साधक शान्ति और योग की तलाश में आते है। भारतीय अध्यात्म एवं दर्शन ने सदियों से पूरी दुनिया को शान्ति और सदाचार की शिक्षा एवं संस्कार प्रदान किये है। वर्तमान समय में भी कथाओं के आयोजन का उद्देश्य यही है कि सभी लोग आपसी प्रेम, सद्भाव और शान्ति के साथ जीवनयापन करे परन्तु मुझे लगता है अब हमारी कथाओं के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिग, जल संरक्षण और प्लास्टिक से होने वाले नुकसान पर चर्चा की जानी चाहिये। अब हमारी कथाओं का स्वरूप हरित विकास और हरियाली संवर्द्धन को होना चाहिये तभी हम आन्तरीक और बाह्य वातावरण को  शुद्ध, स्वच्छ और शान्तिमय बना सकते है। स्वामी जी ने कहा कि आज के समय की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है हमारे द्वारा उपयोग में लाया जाने वाला प्लास्टिक जिसके कारण जल, जंगल, जमीन और जीवन प्रभावित हो रहा है अगर हम सभी संकल्प करे तो इस भयावह समस्या से बाहर आ सकते है और अपनी भावी पीढ़ियों के लिये एक सुरक्षित वातावरण तैयार किया जा सकता है।
 श्री प्रहृलाद मोदी जी ने कहा कि हमारे पर्यावरण के हमने गंदा कर दिया है उस पर्यावरण संरक्षण के लिये सरकार जो प्रोजेक्ट चला रही है उस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में हमारे देश के सन्यासियों का बहुत बड़ा योगदान है। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और माँ भगवती जी ने सन्यासी जीवन में रहते हुये भी पर्यावरण संरक्षण के लिये अथाह कार्य किया और अब भी हर मंच से कर रहे है तथा मैं देख रहा हूँ वे अपनी चिंता नहीं बल्कि देश के 130 करोड़ लोगों के उत्थान के बारे में  हमेशा सोचते है और उस हेतुु अनेक परियोजनाओं पर कार्य भी करते है। स्वामी जी को पर्यावरण संरक्षण आरती के भीष्म पितामह है। कथा व्यास स्वामी अध्यात्मानन्द जी ने कहा कि गंगा तट पर श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करना अत्यंत पुण्यफलदायी है। ’भगवत कथा मन की समस्त व्यथा और जीवन के तनाव को हरती है। कथा के श्रवण मात्र से जीवन में अमोघ शक्तियां प्राप्त होती है। इन शक्तिओं का उपयोग पर्यावरण संरक्षण, स्व कल्याण और फिर समाज कल्याण के लिये भी लगाये। दिव्य कथा के मंच से साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि जीवन बढ़िया बनने के लिये है इसलिये बड़े बनो या न बनो पर बढ़िया बनो। भारतीय संस्कार और संस्कृति में बढ़िया बनने के सभी तत्व समाहित है। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और श्री प्रहृलाद मोदी जी ने कथा व्यास स्वामी अध्यात्मानन्द जी को पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया और सैकड़ों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करने का संकल्प कराया। स्वामी जी के पावन सान्निध्य में श्री प्रहृलाद मोदी जी, स्वामी अध्यात्मानन्द जी और सभी श्रद्धालुओं ने परमार्थ गंगा तट पर होने वाली दिव्य गंगा आरती में सहभाग किया और माँ गंगा से विश्व शान्ति की प्रार्थना की।

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