निष्काम भाव से की गई सेवा सदा सुखदायी होतीः ज्ञान प्रचारक विजय रावत 

देहरादून। निष्काम भाव से की गई सेवा सदा सुखदायी होती है, जो भक्त सत्य को जानकर मानवता की सेवा में निष्काम भाव से अपने आप को समर्पित कर देता है वह जाति-धर्म, सम्प्रदाय से ऊपर उठकर सदा ही मानवता का कल्याण करता है। इस आशय के उद्गार सन्त निरंकारी सत्संग भवन रैस्ट कैम्प के तत्वावधान में आयोजित रविवारीय सत्संग कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए निरंकारी माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन सन्देश को देते हुए स्थानीय ज्ञान प्रचारक विजय रावत ने व्यक्त किये। 
उन्होंने कहा कि मनुष्य को इस निराकार परमेश्वर, इस निंरकार का ज्ञान प्राप्त करके उसको तत्वरूप से जानते है। अंग-संग दीदार करते है। जड़-चेतन, ज्ञान दृष्टि से इसको देखते है अपना नाता व संबंध इस निरंकार से स्वांस-स्वांस सिमरण करके अहसास इसकी अनुभूति में रहते हंै। संगत में आकर तन-मन-धन से अपने आप को समर्पित करके विद्यमान रहते है। सत्गुरू के बगीचे का फूल बनकर इस ज्ञान को हर जगह महकाते है और जन-जन तक इस ज्ञान को पहुचाने का प्रयास करते है। जिसको यह बात समझ में आ गई वो इस निरंकार, संगत के बिना नही रह सकते। युगों-युगों में महात्माओं के मुख से आने वाले वचन हीरे-मोतियों के समान  होते है जोकि इस आत्मा को परमात्मा से जोडते है। जो इस परमात्मा रूपी ज्ञान से सम्भव है। आध्यात्मिक  धर्म का महत्व, मानव को षांन्तिपूर्वक रहकर प्रेम, प्यार, नम्रता, वाला व्यवहार करना है। मनो से नफरत, घृणा, मिटाकर, भेदभाव वाली भावनाओं से ऊपर उठकर संसार में जीवन के सफर को तय करना है। इस एकत्व की भावनाओं से इन्सान को इन्सान के नजदीक लाकर मिलवर्तन की भावना को स्थापित किया जा सकता है। सत्संग समापन से पूर्व अनेकों भक्तों ने गीतों एवं प्रवचनों के माध्यम से हिन्दी, गढ़वाली, नेपाली, पंजाबी, कुमांऊनी एवं अंग्रेजी भाशा का सहारा लेकर संगत को निहाल किया। मंच का संचालन रवि आहूजा ने किया।

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