तिब्बती महिला संगठन ने संघर्ष दिवस की 60वीं वर्षगाॅंठ मनाई

देहरादून। तिब्बती महिला संघर्ष दिवस की 60वीं वर्षगाॅंठ मनाई गई। तिब्बती महिलाओं का तिब्बती इतिहास में एक महत्वपूर्ण योगदान रहा है और यह निरंतर रहेगा। वर्ष 1959 के बाद बदलते घटनाक्रम में पहली बार तिब्बती इतिहास में महिलाओं की राजनैतिक व बौद्विक आवाज स्पष्ट रूप से प्रखर हुई। 12 मार्च, 1959 तिब्बती इतिहास में पहली बार तिब्बती महिलाओं द्वारा तिब्बत पर चीनी अधिपत्य के खिलाफ एक अहिंसात्मक प्रतिरोध दर्ज किया गया।
मंगलवार को तिब्बती महिला संघर्ष दिवस की 60वीं वर्षगांठ पर तिब्बती महिला संगठन अध्यक्ष डोलमा यंगछेन के नेतृत्व में रैली का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि साम्यवादी चीनी नेतृत्व इस धरती से तिब्बती प्रजाति को ही खत्म कर देना चाहता हैं। चीन जानबूझकर व क्रमबद्व तरीके से तिब्बत में मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है बावजूद कि अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय एवं आलोचना के होते हुए भी चीन में तिब्बतियों के स्वायत्त अधिकारों की मनाही कर रखी है 11 वें अवतार के समय चीनी अधिपत्य में प्रताडना से जेल में मृत्यु हो गई थी। 6 वर्ष की आयु में उनकी मान्यता के तीन दिन के भीतर ही परिवार सहित अगवा कर लिया गया। 11 वें पॅंचेन लामा ग्यादेन छयाकि नीयमा पिछले 24 वर्षो में 1995 के समय से चीनी कैद में हैं तथा उनकी उपलब्धता का कोई अता-पता नही है तिब्बती महिला संगठन एक सार्वभौमिक प्रहरी की चाह रखता है उन्होने कहा कि हम सभी धार्मिक नेताओ ंसे तिब्बत में धार्मिक स्वतंत्रता के ऊपर लगे प्रतिबंधों का संज्ञज्ञन लें ताकि तिब्बत में तिब्बतियों की धार्मिक स्वतंत्रता बहाल हो सके। तिब्बत के सभी निवासी एक आजाद तिब्बत में शीघ्र ही एकात्मक हों, ऐसी हमारी कामना है।

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