टिहरी जिले में घनसाली तहसील के द्वारी गांव में स्थित प्रसिद्ध घंटाकर्ण देवता मंदिर, जहां खींच लाती है श्रद्धा

टिहरी, गढ़ संवेदना (वीरेंद्र दत्त गैरोला)। टिहरी जिले में घनसाली तहसील और भिलंगना विकासखंड अंतर्गत द्वारी गांव में स्थित प्रसिद्ध घंडियाल देवता (घंटाकर्ण देवता) मंदिर में जो भी श्रद्धालू सच्चे मन से कोई मन्नत मांगता है वह मन्नतअवश्य पूरी होती है। इस मंदिर के दर्शन करने के लिए लोग दूर-दूर से यहां आते हैं। अब यह मंदिर सड़क मार्ग से जुड़ चुका है। इस मंदिर में पिलखी-द्वारी मोटर मार्ग, घनसाली-द्वारी पैदल मार्ग और मुयाल गांव-द्वारी पैदल मार्ग से पहुंचा जाता है। जिस स्थान पर घंडियाल देवता का यह मंदिर स्थित है वह बहुत ही दर्शनीय और मनोरम स्थान है। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां से नैलचामी पट्टी के कई गांव दिखते हैं। यहां हर तीसरे वर्ष घंडियाल जात (जात्रा) का आयोजन होता है, जिसमें शामिल होने के लिए और घंडियाल देवता से मन्नत मांगने के लिए काफी क्षेत्रों से लोग यहां पहुंचते हैं। घंडियाल जात में मुंबई, दिल्ली, देहरादून, टिहरी आदि क्षेत्रों में रहने वाले प्रवासी भी बड़ी संख्या में गांव पहुंचते हैं। जिस जगह पर घंडियाल देवता का यह मंदिर स्थित है वह मोलखा नाम से जाना जाता है। यह दर्शनीय व मनोरम स्थान अभी राज्य के पर्यटन मानचित्र में स्थान नहीं पा सका है। सरकार को इस स्थल को विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है। आधारभूत सुविधाओं के अभाव में इस गांव से पलायन कर चुके लोगों को भी घंटाकर्ण देवता के प्रति उनकी जो श्रद्धा और आस्था है वह गांव में खींच लाती है। यहां से पलायन कर चुके लोग भी वर्ष में एक या दो बार अपने ग्राम व ईष्ट देवता के दर्शन के लिए अवश्य गांव पहुंचते हैं। जो भी लोग यहां घंटाकर्ण देवता के दर्शन के लिए आते हैं वे यहां डांडा में आस-पास स्थित गुमनाम बुग्यालों के दर्शन करके भी जाते हैं। आछरी खंणदा बुग्याल लोगों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां से डागर पट्टी को जाने वाले पैदल मार्ग पर चाकी सैंण, टोपल्या सैंण और मुयालगांव जाने वाले मार्ग पर कांडा पाणी जैसे सुंदर स्थल स्थित हैं। ये स्थान बेहद रमणीक हैं। घंटाकर्ण देवता के मंदिर के पास ही नागरजा देवता का मंदिर भी स्थित है।

  

 

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