चुनाव नतीजों के लिए करना होगा लंबा इंतजार

 

भारत निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव में शत प्रतिशत ईवीएम में वीवीपीएट लगाने की लगाने की व्यवस्था की है। वीवीपीएट बक्से के अंदर ईवीएम में दर्ज मत पर्ची के रूप में जमा होंगे। अब तक आयोग ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के अंदर किसी एक वीवीपीएट में दर्ज मतों की गिनती कर, इसका मिलान संबंधित ईवीएम से करने की व्यवस्था की थी। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को प्रत्येक विधानसभा में एक की जगह पांच वीवीपीएट में दर्ज पर्ची गिनने के आदेश दिए हैं। इस कारण उत्तराखंड की सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में अब कुल 350 वीवीपीएट की गणना होगी। वीवीपीएट की गणना प्रक्रिया पूरी तरह बैलेट पेपर वाली पुरानी व्यवस्था के समान ही है। इसमें पहले मतपत्रों का 50-50 की संख्या में बंडल बनाया जाएगा। फिर इन्हें गिना जाएगा। इस कारण एक वीवीपीएट की गिनती करने में कम से कम तीन घंटे का समय लगना तय है। वीवीपीएट की गिनती ईवीएम की गिनती पूरी होने के बाद ही होगी। इसके लिए आयोग को मतगणना केंद्र पर अतिरिक्त स्टाफ भी नियुक्त करना पड़ेगा। 2014 में दोपहर बाद तीन बजे तक उत्तराखंड में सभी लोकसभा सीट का परिणाम घोषित हो गया था।उत्तराखंड में टिहरी, पौड़ी लोकसभा क्षेत्र तीन-तीन और अल्मोड़ा- पिथौरागढ़ लोकसभा क्षेत्र तो चार जिलों में फैला है। मतगणना सभी जिलों में एक साथ शुरू होनी है। फिर सभी जिलों का अंतिम परिणाम सबंधित सीट के रिटर्निंग अधिकारी कार्यालय में भेजा जाएगा। यहां से सभी विधानसभा सीटों का परिणाम जोड़कर लोकसभा क्षेत्र का अंतिम परिणाम जारी होगा। इस तरह मतगणना भी कई जिलों में बंटी होने से उत्तराखंड में अतिरिक्त समय लगना तय है।  भारत निर्वाचन आयोग ने सर्विस वोटर की मतदान व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव कर दिया है। इस बार सभी सर्विस वोटर को बैलेट पेपर ऑनलाइन भेजे गए हैं। सर्विस वोटर के मताधिकार का प्रयोग सही तरीके से हो इसके लिए बैलेट पेपर पर बारकोड की भी व्यवस्था की गई है। मतगणना केंद्रों पर सर्विस वोटर का पैकेट इस पर दर्ज बार कोड को पढ़ने के बाद ही खोला जाएगा। इस तरह इस बार सर्विस वोटर की गिनती में भी अतिरिक्त समय लगेगा। उत्तराखंड में इस बार 88 हजार 200 सर्विस वोटर हैं।

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