खैट पर्वत पर्यटन व तीर्थाटन की दृष्टि से मनोरम

देहरादून।  टिहरी जिले में स्थित खैट पर्वत पर्यटन व तीर्थाटन की दृष्टि से मनोरम है। खैट पर्वत समुद्रतल से 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। खैट पर्वत के चरण स्पर्श करती  भिलंगना नदी का दृश्य देखते ही बनता है।

खैट पर्वत वनदेवियों (अप्सराओं) का प्रमुख निवास स्थल है। देवलोक से भू-लोक तक रमण करने वाली ये परियां हिमालय क्षेत्र में वनदेवियों के रूप में जानी जाती हैं। गढ़वाल क्षेत्र में वनदेवियों को आछरी-मांतरी के नाम से जाना जाता है। कठित भौगोलिक परिस्थितियों के बीच किसी प्राकृतिक आपदा व अनर्थ से बचने के लिए पहाड़वासी वनदेवियों को समय-समय पर पूजते हैं। इससे ये वनदेवियां खुश रहती हैं।  खैट गुंबद आकार की एक मनमोहक चोटी है। इस चोटी में म खमली घास से ढका एक खूबसूरत मैदान है। जहां से दृष्टि उठाते ही सामने क्षितिज में एक छोर तक फैली हिमचोटियों के भव्य दर्शन होते हैं। आसपास दूर-दर तक कोई दूसरा पर्वत शिखर न होने से यह इकलौता लघुशिखर अत्यंत भव्य मैदान पर पहुंचकर ऐसा आभास होता है मानों हम वसुंधरा की छत पर पहुंच गए हैं।दिल इस पर्वत शिखर से लौटने की अनुमति आसानी से नहीं देता है। खैट से दिखने वाले प्रमुख हिमशिखरों में बंदरपूंछ, गंगोत्री, स्वर्गारोहणी, यमुनोत्री, भृगुपंथ, सत्तापंथ, त्रिशुल, चैखंबा, हाथी पर्वत, स्फाटिक जौली,ऐंच्वा खतलिंग आदि शामिल हैं। टिहरी जिले की आरगढ़, गोनगढ़, केमर पट्टी व भिलंगना घाटी का वृहद क्षेत्र यहां से दृष्टिगोचर होता है।

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