खांसी न रूक पाने के कारण राज्यपाल पूरा नहीं पढ़ पाई अभिभाषण

देहरादून। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य अभिभाषण के दौरान खांसी न रूक पाने के कारण अभिभाषण पूरा नहीं पढ़ पाईं। जब उन्हें खांसी शुरु हुई तो रूक नहीं पाई। उन्हें लगातार खांसी होती रही। काफी देर तक वे खांसी के बीच ही अभिभाषण पढ़ती रहीं, उन्होंने दो-तीन बार पानी भी पिया लेकिन जब खांसी नहीं रूक पाई तो सचिव व उनके परिसाहय ने उन्हंे सलाह दी कि अभिभाषण का अंतिम पेज पढ़कर इसे समाप्त कर दें। फिर राज्यपाल ने अभिभाषण के अंतिम पेज पढ़कर औपचारिकता पूरी की। 10.55 बजे राज्यपाल ने अभिभाषण शुरु किया, विपक्ष के हंगामे के बीच उन्होंने अपना अभिभाषण जारी रखा। विपक्ष के सदन से बहिर्गमन करने के कुछ देर बाद राज्यपाल को खांसी शुरु हुई जो कि फिर लगातार होती रही। राज्यपाल ने जब अभिभाषण का अंतिम पेज पढ़कर औपचारिका पूरी की तो स्पीकर ने सदन अपरान्ह तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। तीन बजे सदन सदन की कार्यवाही शुरु होने के बाद स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल ने राज्यपाल के अभिभाषण का पाठ किया।_______________________________________

क्यों शुरु हुआ 11 बजे से पहले राज्यपाल का अभिभाषण

देहरादून। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य के जल्दी विधानसभा पहुंचने से प्रोटोकाॅल का संकट खड़ा हो गया। विधानसभा में राज्यपाल के ठहरने के लिए कोई आॅफिस या स्थान नहीं है। प्रोटोकाॅल में राज्यपाल राज्य में सरकार में सबसे शीर्ष स्थान पर है। ऐसे में राज्यपाल बेबी रानी मौर्य के जल्दी पहुंचने पर उन्हें विधानसभा में किस कक्ष में ठहराया जाता ? विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री या किसी मंत्री के कक्ष में राज्यपाल को ठहराया नहीं जा सकता था। ऐसे में 11 बजे से पहले ही राज्यपाल ने अभिभाषण पढ़ना शुरु कर दिया।
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद से हर वर्ष ठीक पूर्वाह्न 11 बजे से राज्यपाल का अभिभाषण होता आया है, लेकिन इस बार राज्यपाल बेबी रानी मौर्य समय से पहले विधानसभा पहुंच गई। इसके चलते सदन में 11 बजने से करीब पांच मिनट पहले राज्यपाल का अभिभाषण शुरु हो गया। विपक्ष ने इसको लेकर सवाल उठाए। नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा ह्रदयेश ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं का उल्लंघन बताया। उनका कहना था कि सरकार ने संवैधानिक मर्यादाओं को तोड़ते हुए समय से पहले सत्र की कार्यवाही शुरु कर दी। वहीं, इस बारे में संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत का कहना है राज्यपाल का अभिभाषण सदन की कार्यवाही का हिस्सा नहीं होता। राज्यपाल का अभिभाषण महज सेरोमोनियल कार्यक्रम था। ऐसे में अभिभाषण के लिए समय सीमा तय करना ठीक नहीं है।

 

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