कलश यात्रा के साथ हुआ श्रीमद भागवत महापुराण का शुभारम्भ

देहरादून। श्रीमद भागवत महापुराण रसवर्षा शुभारम्भ मानस मन्दिर समिति द्वारा मानस मन्दिर बकरालवाला मन्दिर प्रगंण में मंगल कलश यात्रा के साथ हुआ। श्रीमद भागवत महापुराण रसवर्षा जिसमें प्रसिद्ध कथा प्रवक्ता आचार्य सतीश जगूडी द्वारा कथा वाचन किया गया, पहले दिन कथा को सुनने के लिए काफी संख्या में भक्त पहुंचे। कथा प्रवक्ता आचार्य सतीश जगूड़ी द्वारा कथा वाचन करते हुऐ कहा की जब मनुष्य के जन्म-जन्मान्तर का पुण्य उदय होता है, तभी उसे इस भागवतशास्त्र की प्राप्ति होती।
कथा प्रवक्ता आचार्य सतीश जगूडी द्वारा कथा में बताया की कलियुग में अधिकतर भक्ति स्वार्थ सिद्धि हेतु होती है इसलिए वह सात्त्विक भक्ति नहीं है। सात्त्विक भक्ति यानी निस्स्वार्थ बिना किसी हेतु के। जब जरूरत हो कीए काम हो गया तो भूल गये, स्वार्थ की भक्ति में हमें धन संपति आदि मिल जायेगी क्योंकी यह सब प्रभु के यहां मिट्टी से ज्यादा कुछ नहीं। जब प्रभु से मिट्टी मांगते है तो प्रभु कहते हैं जितनी चाहो ले जाओ। पर सात्त्विक भक्ति के बल पर प्रभु भक्त के हो जाते है भक्त  के वश में हो जाते हैं । भक्त के लिए नंगे पाँव दौड.ते है जैसे प्रहलादजी द्रौपदी भक्त के लिए बिकने को तैयार हो जाते है जो लोग एकाग्रचित होकर भगवान के नाम का जप करते है, परमात्मा उनके जीवन के सारे कष्टों का हरण कर लेते हैं। भगवान तक पहुंचने के तीन मार्ग है सत, चित और आनंद। इन तीन रास्तों से आप भगवान तक पहुंच सकते हैं। आप देखना चाहें भगवान का स्वरूप क्या है तो भगवान चतुर्भुज रूप में प्रकट नहीं होंगे। भगवान का पहला स्वरूप है सत्य। जिस दिन आपके जीवन में सत्य घटने लगे आप समझ लीजिए आपकी परमात्मा से निकटता हो गई। सत भगवान का पहला स्वरूप है फिर कहते हैं चित स्वयं के भीतर के प्रकाश को आत्मप्रबोध को प्राप्त करिए। फिर है आनंद। देखिए सत और चित तो सब में होता है पर आपमें जो है उसे प्रकट होना पड़ता है। वैसे तो आनंद हमारा मूल स्वभाव है पर हमको आनंद निकालना पड़ता है मनुष्य का मूल स्वभाव है आनंद फिर भी इसके लिए प्रयास करना पड़ता है। सत, चित, आनंद के माध्यम से भागवत में प्रवेश करें। यहां भागवत एक और सुंदर बात कहती है भागवत की एक बड़ी प्यारी शर्त है कि मुझे पाने के लिए मुझ तक पहुंचने के लिए या मुझे अपने जीवन में उतारने के लिए कुछ भी छोडना आवश्यक नहीं है। ये भागवत की बड़ी मौलिक घोषणा है। इसीलिए ये ग्रंथ बड़ा महान है। भागवत कहती है मेरे लिए कुछ छोडना मत आप। संसार छोडने की जरूरत नहीं है। कई लोग घरबार छोड़कर, दुनियादारी छोड़कर पहाड़ पर चले गए तीर्थ पर चले गए, एकांत में चले गए तो भागवत कहती है उससे कुछ होना नहीं है। मामला प्रवृत्ति का है। प्रवृत्ति अगर भीतर बैठी हुई है तो भीतर रहे या जंगल में रहें बराबर परिणाम मिलना है। श्रीमद भागवत महापुराण रसवर्षा में भक्त दूर दूर से कथा को सूनने के लिए आये थे इस  अवसर आचार्य पंकज डोभाल, उपाचार्य रितिक नौटियाल, राकेश गौड़, आशीष, हनी राणा, आदि मौजूद थे।

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