आयुर्वेद विवि के निलंबित कुलसचिव डॉ. मृत्युंजय मिश्रा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल

देहरादून। भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के निलंबित कुलसचिव डॉ. मृत्युंजय मिश्रा के खिलाफ विजिलेंस ने शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश विजिलेंस की अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया। 4700 पन्नों की चार्जशीट में विजिलेंस ने कुल 73 गवाह बनाए हैं। एसएसपी विजिलेंस सैंथिल अबुदई कृष्णराज एस ने बताया कि मृत्युंजय मिश्रा के कुलसचिव रहते टीए-डीए बिल में गड़बड़ी, अकूत संपत्ति जुटाने और नजदीकियों को गलत तरीके से आर्थिक लाभ पहुंचाने समेत पांच बिंदुओं पर चार्जशीट तैयार की गई है।

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के निलंबित कुलसचिव डॉ. मृत्युंजय मिश्रा को विजिलेंस ने तीन दिसंबर को उसके मोहिनी रोड स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया था। विशेष न्यायाधीश विजिलेंस की कोर्ट में पेशी के बाद उसे न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार सुद्धोवाला भेज दिया गया। एसएसपी विजिलेंस ने बताया कि अभी भ्रष्टाचार के इस मामले में केवल मृत्युंजय मिश्रा के ही खिलाफ चार्जशीट दी गई है। ट्रैवलिंग अलाउंस बिल में मृत्युंजय मिश्रा की ओर से की गई गड़बड़ी पकड़ में आई है। उसने ट्रेन के दस और हवाई यात्रा के दो टिकटों का भुगतान लिया था। वहीं उसकी साढ़े बारह करोड़ रुपये की संपत्तियों का पता चला है।  वहीं, एक रिश्तेदार की पत्नी को विश्वविद्यालय में नौकरी देने और उसके बिना ड्यूटी किए चार लाख रुपये का भुगतान करने के भी दस्तावेज मिल गए हैं। इसके साथ दिल्ली में असिस्टेंट रेजीडेंट कमिश्नर रहते मृत्युंजय मिश्रा ने कुछ फर्जी आइडी बनवाई थी। इन सब बिंदुओं पर साक्ष्यों के साथ चार्जशीट तैयार की गई है। वहीं, मृत्युंजय ने अमेजन ऑटोमेशन कंपनी की प्रोपराइटर शिल्पा त्यागी और क्रिएटिव इलेक्ट्रॉनिक की प्रोपराइटर नूतन को मृत्युंजय मिश्रा की ओर से दिए गए दो करोड़ रुपये के टेंडर में की नियमों की अवहेलना की जांच की जा रही है। जल्द ही इसमें भी चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी जाएगी।

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