अल्पसंख्यक निदेशालय पर गरजे मदरसा शिक्षक

देहरादून। चार साल से मानदेय नहीं मिलने से आक्रोशित मदरसा शिक्षकों ने शुक्रवार को भगत सिंह कॉलोनी स्थित अल्पसंख्यक निदेशालय के गेट पर धरना देकर प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, मदरसा बोर्ड, शिक्षा विभाग और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने जल्द उनकी समस्या का समाधान नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
शुक्रवार सुबह मदरसा शिक्षक संघ के बैनर तले धरना देने पहुंचे मदरसा शिक्षकों ने बताया कि प्रदेश के मदरसों में 700 से अधिक शिक्षक कार्यरत है। इन्हें केंद्र सरकार की ओर से एसपीक्यूईएम योजना के तहत 6 से 12 हजार रुपये मानदेय मिलता है। केंद्र सरकार ने अब आईडीएमआई (इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट और माइनोरिटी इंस्टीट्यूशंस) और एसपीक्यूईएम (स्कीम टू प्रोवाइड क्वालिटी एजुकेशन इन मदरसाज) को एक साथ मर्ज कर एसपीईएमएम (स्कीम टू एलीमेंट्री एजुकेशन इन माइनोरिटी मदरसाज) कर दिया है। वहीं, इसके संचालन का जिम्मा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से हटाकर समग्र शिक्षा अभियान के तहत शिक्षा विभाग को सौंप दिया है। जिन्हें 2015-16, 2016-17, 2017-18, 2018-19, 2019 का करीब 34 करोड से अधिक बकाया भुगतान नहीं किया गया है। जिसकी वजह से उनको आर्थिक एवं मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरोप लगाया कि वे तमाम अफसरों, विधायकों एवं मंत्रियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला। दिनभर धरना देने के बाद उन्होंने शाम को अल्पसंख्यक निदेशक सुरेश चंद्र जोशी, अल्पसंख्यक आयोग सचिव जेएस रावत और मदरसा बोर्ड के डिप्टी रजिस्ट्रार हाजी अखलाक अंसारी को ज्ञापन सौंपा। दिसंबर में उनके संबंध में दिल्ली में मंत्रालय में बैठक होनी है। उम्मीद है कि उस बैठक में उनकी समस्या का समाधान हो जाये। इस दौरान मौहम्मद इस्लाम, इशरान अली, संजीव सैनी, मौहम्मद फिरोज, उजमा प्रवीण, माशूक, बिलकिस जहां, जाहिद, अनीस, राकेश कुमार, यशवीर, गुलशाद राव, आशिया, इरफाना, दीपा राणा, हीना राव, विशाल आजाद, सरफराज नवाज, अब्दुल सलाम, मुर्सलीन, मौ. शाहरूख आदि मौजूद रहे।

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